कहते है कि धैर्य आपको उस शिखर पर ले जाता है, जहां आपकी शालीनता का लोग उदाहरण दिया करेंगे. कुछ ऐसे ही तो हैं राहुल द्रविड़. हर बॉल और हर रन ने एक-एक ईंट की तरह काम किया तब जा कर भारतीय टीम की दीवार तैयार हुई.

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राहुल द्रविड द्वारा क्रिकेट में दिए योगदान के कारण उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि देने की बात भी सामने आई. लेकिन द्रविड ने इसके लिए साफ़ मना कर दिया. जिसके बाद कई लोगों को इस फ़ैसले पर हैरानी हुई. मीडिया ने भी इस ख़बर को काफ़ी उछाला.

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लेकिन द्रविड ने एक बार फिर अपने धैर्य का परिचय देते हुए इसका जवाब दिया और ये जवाब सुन कर हर किसी के अंदर द्रविड के लिए इज़्ज़त और बढ़ गई.

द्रविड ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि 'डॉक्टरेट की डिग्री बिना किसी मेहनत के मिलना सही नहीं, मैंने अपनी मां को इसके लिए कड़ी मेहनत करते देखा है. मां जब 55 साल की हुईं, तब उन्होंने PhD पूरी की और डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की. मेरी पत्नी ने 7 साल मेहनत से पढ़ाई की, तब जा कर वो डॉक्टर बनीं. मैं भी डॉक्टरेट की डिग्री चाहता हूं, लेकिन ऐसे नहीं.'

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उनकी इस बात में ही द्रविड की सोच झलकती है. एक शानदार बल्लेबाज़ रह चुके द्रविड को साफ़ और सच बोलना पसंद है. आज तक किसी भी कॉन्ट्रोवर्सी में इनका नाम नहीं आया. द्रविड शायद इकलौते ऐसे बल्लेबाज़ हैं, जिनका कोई आलोचक नहीं और इसका कारण इस जवाब में ही छिपा है.