RPF की टीम ने चलती ट्रेन से एक इंजीनियर को फेंक दिया, जिसके कारण उसकी जान चली गयी. 22 वर्षीय इंजीनियर का कसूर बस इतना था कि उसने RPF की टीम का ट्रेन में सामान बेचने वालों और यात्रियों से पैसे वसूलते हुए वीडियो बना लिया था.

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24 अगस्त, 2017 को राहुल सिंह चम्बल एक्सप्रेस से दिल्ली से बिहार जा रहा था. उसी दिन लोगों ने उसे घायल अवस्था में झांसी के रेलवे ट्रैक पर पड़ा पाया. जब उसे अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया.

झांसी में हुई FIR के अनुसार, उस दिन RPF के आठ सदस्य ट्रेन में चढ़े थे और लोगों से पैसे वसूल रहे थे. इस टीम में तीन महिला कांस्टेबल भी थीं. राहुल सिंह ने ऐसा करते हुए उनका वीडियो बना लिया था.

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इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील, चश्मदीद कुलदीप शर्मा ने बताया कि कांस्टेबल राहुल को बुरी तरह पीट रहे थे. जब अन्य यात्रियों ने विरोध किया, तो उन्हें भी धमकाया गया. उसे बुरी तरह पीटने के बाद उसे ज़मीन से RPF अधिकारियों का थूक चाटने पर मजबूर किया गया. उसे चलती ट्रेन से फेंकने से पहले उसकी सोने की चेन, ब्रेसलेट और मोबाइल भी छीन लिया गया. हालांकि, उसके पास से रेलवे पुलिस ने 4,700 रुपये बरामद किये थे.

पहले कुलदीप शर्मा ने महोबा में FIR दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन वहां FIR दर्ज नहीं की गयी. अधिकारियों ने मौत की वजह छुपाने के लिए कह दिया कि राहुल के पास टिकेट नहीं था, इसलिए उसने कूद कर ख़ुदकुशी कर ली.

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इसके बाद कुलदीप शर्मा ने इस मामले के बारे में सुरेश प्रभु को ट्वीट किया, जिसके बाद RPF स्क्वाड के ख़िलाफ़ FIR दर्ज कर ली गयी है.

राहुल की बीवी चार महीने की गर्भवती है. इतनी छोटी उम्र में उसकी हत्या कर दी गयी, क्योंकि उसने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी. मीडिया भी इस ख़बर को कवर करने में ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखा रही, लेकिन राहुल के परिवार को इंसाफ़ की उम्मीद है. हम आशा करते हैं कि उसके हत्यारों को सज़ा ज़रूर मिले.

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