नवंबर में नोटबंदी के फैसले के बाद से भले ही मोदी सरकार को देश भर से मिश्रित प्रतिक्रिया मिली हो, लेकिन सरकार ने हमेशा से ही इस फैसले को डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के तौर पर प्रचारित किया है. इसी सिलसिले में प्राइवेट सेक्टर के सबसे महत्वपूर्ण बैंकों में शुमार HDFC बैंक ने भी एक बड़ा फैसला लिया.

प्राइवेट सेक्टर के दूसरे सबसे बड़ा बैंक, एचडीएफसी अब कैश के लेन-देन पर लोगों से ज्यादा टैक्स वसूलने की फिराक में है. एचडीएफसी का ये कदम उन लोगों के लिए काफी घाटे का सौदा साबित होगा, जो हर महीने कई बार अपने अकाउंट से पैसे निकालते हैं.

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बैंक के एक अधिकारी के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक एक मार्च से पैसों के लेन-देन पर टैक्स की कीमतों में बढ़ोतरी करने जा रहा है. बैंक की वेबसाइट के अनुसार, थर्ड पार्टी लेन-देन पर 25,000 करोड़ रुपये की सीमा तय की है. साथ ही बैंक की ब्रांच में मुफ्त लेन-देन की संख्या को पांच से घटाकर चार कर दिया गया है और गैर-शुल्क लेन-देन के लिये टैक्स भी अब 150 रुपये कर दिया है.

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यही नहीं बैंक ने अपनी शाखाओं में मुफ्त नकद लेन-देन की सीमा को भी अब दो लाख रुपये कर दिया है. इसमें पैसे जमा करना और निकालना दोनों शामिल है. इससे ज्यादा जमा या निकालने पर ग्राहकों को कम से कम 150 रुपये या पांच रुपये प्रति हजार का भुगतान करना होगा. वहीं दूसरी शाखाओं में मुफ़्त लेन-देन 25,000 रुपये है उसके बाद टैक्स उसी स्तर पर लागू होगा.

देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक, आईसीआईसीआई की वेबसाइट पर भी इस मामले में जानकारी मौजूद है. इसके मुताबिक, चार ट्रांजेक्शन से ज्यादा बार पैसा निकालने के बाद हर ट्राजेंक्शन पर कम से कम 150 रुपये आपको अपनी जेब से ढीले करने पड़ सकते है. इसके साथ ही एक्सिस बैंक ने भी कैश निकासी पर शुल्क लागू करना शुरु कर दिया है. एक्सिस बैंक भी एक लाख रुपये प्रति महीने से ऊपर के जमा पर या पांचवीं निकासी से 150 रुपये या प्रति हजार रुपये पर 5 रुपये चार्ज कर रहा है.

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गौरतलब है कि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सालाना बजट में भी एक कानून को जल्दी ही शुरु करने की बात कही थी. इसके मुताबिक, एक दिन में 3 लाख रुपए से ज्यादा के कैश ट्रांजेक्शन को अवैध करार दिया जाएगा और ऐसा करने की स्थिति में लोगों को कानूनन सज़ा भी भुगतनी पड़ सकती है.

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