विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित किया. सुषमा स्वराज हिन्दी में संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रही थीं. विदेश मंत्री ने कई ग्लोबल मुद्दों पर बात की जिनमें आतंकवाद, ग्लोबल वार्मिंग, बेरोज़गारी, gender empowerement, साइबर सिक्योरिटी जैसे मुद्दे शामिल थे.

पीएम मोदी के इकोनॉमिक मॉडल के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि 'मोदीजी का विज़न नौकरियां उत्पन्न करने वाली स्किल्स पर ज़्यादा फोकस करने को लेकर है'. सुषमा स्वराज ने जन-धन योजना, मुद्रा योजना, स्किल इंडिया, उज्जवल योजना और डिजिटल इंडिया का उल्लेख भी किया. उन्होंने कहा कि 'इन योजनाओं ने भारत के आम आदमी की ज़िंदगियों को प्रभावित करने में कामयाबी पाई है'.

उन्होंने कहा कि दुनिया में आतंकवाद आग की तरह फैल रहा है और ये उन सबसे बड़ी ग्लोबल समस्याओं में है जिसका समाधान संयुक्त राष्ट्र तलाश रहा है. यदि हम अपने दुश्मन (आतंकवाद) को ही परिभाषित करने पर सहमत नहीं होंगे तो इससे मिलकर कैसे लड़ सकते हैं? यदि हम अच्छे और बुरे आतंकियों के बीच भेद करते रहेंगे तो उससे हल नहीं निकलेगा'.

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2030 के टारगेट के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि 'भारत ने कई कड़े फैसले लिए हैं, जिसकी वजह से देश में Sustainable development की शुरूआत हो चुकी है'. उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी की वजह से देश को हुए फ़ायदों के बारे में भी चर्चा की. SDG के साथ जुड़े ग्लोबल पार्टनरशिप की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में यूएन डेवलेपमेंट पार्टनरशिप फंड की शुरूआत भी इस साल कर दी गई है.

हाल ही में पाकिस्तान ने यूएन में भारत को कश्मीर में चल रही हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था. पाक के पीएम के बयान के जवाब में सुषमा स्वराज ने कहा कि 'एक तरफ़ तो भारत गरीबी से लड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान भारत से ही लड़ने की कोशिशों में लगा हुआ है. उन्होंने कहा कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान की तरफ़ अमन और दोस्ती का हाथ बढ़ाने की कोशिश की थी और पाक के पीएम को देश और दुनिया को बताना चाहिए कि उन्होंने क्यों इस ऑफ़र को ठुकराया'.

सुषमा स्वराज ने कड़ा जवाब देते हुए पाकिस्तान को आतंकवादियों का गढ़ कहा. उन्होंने कहा कि 'जहां भारत ने आईआईटी, आईआईएम, एम्स जैसे संस्थान खोले हैं, वहीं पाकिस्तान LeT, JeM और HM जैसे आतंकवादी संस्थानों का गढ़ है. आज पाकिस्तान के हुक्मरानों को मिलकर ये सोचने की जरूरत है कि दोनों देश एक साथ बनें लेकिन भारत को लोग आईटी हब के रुप में जानते हैं कि जबकि पाकिस्तान को दुनिया में आतंक का पनाहगाह माना जाता है.'

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