दुनिया के कई हिस्सों में अलग-अलग नामों से पाया जाने वाला गांजा तमाम तरह की धारणाओं का शिकार रहा है. भारत में ग़ैर-क़ानूनी होने के बावजूद इसका कई जगह इस्तेमाल होता है. वहीं अमेरिका में इसे क़ानूनी करने की मांग काफ़ी सालों से उठती रही है. 

गांजा के समर्थक मानते हैं कि इससे डिप्रेशन, पार्किंसन जैसी कई बीमारियों से लड़ने में राहत मिलती है. कई लोग इसका इस्तेमाल थेरेपी के रूप में भी करते हैं. इसी का परिणाम है कि अमेरिका के कई क्षेत्रों में इसे मेडिकल तौर पर लीगल कर दिया गया है. मगर एक नई रिपोर्ट इसके मेडिकल फायदों को झुठला रही है.

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एक फेडरल ए़डवाइजरी कमेटी के मुताबिक़, गांजे से कई लोगों को नींद आने में मदद मिल सकती है और कई बार ये दर्द को कम करने में भी राहत दे सकता है. लेकिन इसके अलावा इस पौधे के बाकी मेडिकल फायदों को इस कमेटी ने सिरे से नकार दिया है.

रिसर्च के मुताबिक, इस बात के कोई प्रमाण सामने नहीं आए हैं कि गांजे से एपीलेप्सी नामक बीमारी को ठीक करने में मदद मिलती है. गौरतलब है कि दुनिया भर में गांजे को एपीलेप्सी के उपचार के लिए मेडिकल तौर पर लिया जाता है.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि इस बात के भी पुख्ता प्रमाण नहीं हैं कि गांजे से कैंसर या पार्किंसन बीमारी की उपचार किया जा सकता है और न ही इससे गंदी आदतों को छुड़ाने में किसी तरह की मदद मिलती है. इन विशेषज्ञों की माने तो गांजे के मेडिकल फायदों को लेकर देश और दुनिया को एक बार फिर नए सिरे से सोचने की ज़रूरत है.

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इस रिपोर्ट को नेशनल एके़डेमिक्स ऑफ साइंस, इंजीनियरिंग एंड मेडिसिन ने जारी किया है और इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि नीतियां बनाने वालों को, डॉक्टरों को और मरीजों को भी पुख्ता प्रमाण सामने आने पर ही गांजे के मेडिकल फायदों को लेकर अपनी राय बनानी चाहिए. हालांकि, रिपोर्ट में इस बात के प्रमाण सामने आए हैं कि गांजे से सिट्जोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी हो सकती है, खासकर जो लोग इसका रेग्युलर इस्तेमाल करते हैं.

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इस बात के भी कोई प्रमाण सामने नहीं आए हैं कि इसके इस्तेमाल से पढ़ाई या किसी तरह की सोशल लाइफ़ पर कोई फर्क पड़ता है और न ही गांजा पीने से हार्ट अटैक जैसी घटनाएं हो सकती है. मगर कुछ प्रमाणों के मुताबिक़ गांजा पीने से लोग शराब और तंबाकू जैसे नशों की तरफ मुड़ सकते हैं. 

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