एक वो दौर था जब पुरुषों को महिलाओं का घर से बाहर निकल कर काम करना पसंद नहीं था, लेकिन अब समय ने करवट बदल ली है. आज जो काम पुरुष कर रहे हैं, महिलाएं भी वही काम कर रही हैं. आज जितने क़ामयाब पुरुष हैं महिलाएं भी उनके बराबर कंधे से कन्धा मिलाकर चल रहीं हैं. आज दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियों की कमान महिलाओं के हाथों में है.

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जयपुर का गांधीनगर रेलवे स्टेशन देश का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन बन गया है, जिसे केवल महिलाएं संभाल रही हैं. उत्तर पश्चिम रेलवे ने एक अच्छी पहल शुरू करते हुए इस स्टेशन के स्टेशन मास्टर, इंजीनियर, टिकट क्लर्क, मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक, फ़्लैग इंडिकेटर, प्वांइट्स मैन, गेटमैन और कुली तक के सभी पदों पर महिलाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा में तैनात जीआरपी की टीम में भी सभी महिलाएं ही हैं. गांधीनगर रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन 25 ट्रेनें रुकती हैं, वहीं कई ट्रेन यहां से गुजरती भी हैं. इस स्टेशन पर प्रतिदिन क़रीब 7000 यात्री आते-जाते हैं.

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हालांकि, इससे पहले से मुंबई का उपनगरीय लोकल स्टेशन 'माटुंगा' भी पूरी तरह से महिलाओं द्वारा ही संचालित किया जा रहा है, लेकिन गांधीनगर मेन लाइन का पहला ऐसा स्टेशन बन गया है. यहां सभी महिलाएं कड़े अनुशासन के साथ काम करती हैं. कुछ समय पहले एक संदिग्ध व्यक्ति बिना टिकट के प्लेटफ़ार्म पर घूम रहा था तो टिकट कलेक्टर वंदना और अपूर्वा ने उसे धर दबोचा और उससे 260 रुपये का जुर्माना भी वसूला.

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इस स्टेशन पर तैनात हर स्टाफ़ को पूरी तरह से ट्रेंड किया गया है. महिलाओं की सुरक्षा के लिए यहां सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मॉनिटरिंग जीआरपी थाने की महिला कर्मी करती हैं. पूरी तरह से WIFI से जुड़े इस स्टेशन पर महिला कर्मचारी तीन पारियों में काम करती हैं.

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कई यात्रियों का कहना है कि जब इस स्टेशन में पुरुष काम किया करते थे तो यहां माहौल बेहद ख़राब था. उस समय यहां पर करप्शन भी बहुत था कर्मचारी यात्रियों की सुनते नहीं थे, कामचोरी ज़्यादा होती थी. जबसे महिलाओं को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है गई है स्टेशन बहुत अच्छा चल रहा है. महिलाएं पुरुषों से दोगुनी मेहनत कर रही हैं.

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स्टेशन पर टिकट कलेक्टर के तौर पर तैनात वंदना शर्मा का कहना है कि 'लोग महिलाओं को कमज़ोर समझते हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. महिलाएं पुरुषों से डबल मेहनत करती हैं'.

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उत्तर पश्चिमी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी तरुण जैन ने बताया कि इस स्टेशन से हर रोज लगभग 7 हजार यात्री सफ़र करते हैं. इस स्टेशन पर स्टेशन मास्टर से लेकर पॉइन्ट्स मैन तक सभी 32 महिला कर्मचारियों को तैनात किया गया है. गांधीनगर स्टेशन के आसपास कई सारे कॉलेज और कोचिंग सेंटर होने के कारण यहां आने वाले यात्रियों में बड़ी संख्या में लड़कियां और महिलाएं हैं. महिला कर्मचारियों को पूर्ण आत्मविश्वास से कार्य करने के लिये खास प्रशिक्षण दिया गया है. उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखकर सीसीटीवी लगाए गए हैं.

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