फ़िल्म 'धूम' सीरीज़ में धमाकेदार चोरियों से जॉन अब्राहम, रितिक रोशन और आमिर खान ने स्टारडम की नई ऊंचाईयों को छुआ था. लेकिन वो रील लाइफ़ थी और रियल लाइफ़ में ऐसा करना न केवल काफ़ी जोख़िम भरा है, बल्कि आपको जेल की सलाखों के पीछे भी पहुंचा सकता है.

मगर नवी मुंबई में एक गैंग ने ये रिस्क उठाते हुए शातिराना अंदाज़ में एक चोरी को अंजाम दिया है. Juinagar के एक बैंक में लूटेरों ने 30 बैंक लॉकर्स में लूटपाट कर डाली. ये लुटेरे इसी बिल्डिंग में मौजूद एक शॉप से 40 फ़ीट लम्बी सुरंग को खोदने के बाद बैंक तक पहुंचे थे.

ये सुरंग सेक्टर 11 में मौजूद भक्ति रेंज़ीडेंशियल बिल्डिंग, बालाजी जनरल स्टोर, शॉप नंबर 7 से शुरू हुई. इस बिल्डिंग में शॉप नं 1 से 4 बैंक की ही है. ये दिलचस्प है कि बालाजी से अगली शॉप को एक सिक्योरिटी एजेंसी ने लिया हुआ है.

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बीते सोमवार बैंक खुलने पर इस लूट का खुलासा हुआ. पुलिस का मानना है कि गैंग शुक्रवार को रूम पहुंच गया होगा, गैस कटर्स से लॉकर्स को खोला होगा और शनिवार और रविवार को आराम से चोरी अंजाम दी होगी. इन लुटेरों को पकड़ने के लिए पुलिस ने छह टीमों का गठन किया है.

इन लुटेरों को पकड़ने के लिए छह टीमों का गठन किया गया है. पुलिस का कहना है कि इस प्लान की शुरूआत छह महीने पहले हुई थी जब शॉप नं 7 को किसी बच्चन प्रसाद ने रेंट पर लिया था. कुछ महीने दुकान चलाने के बाद प्रसाद सितंबर में तबीयत खराब होने के चलते वापस झारखंड चला गया था. इसके बाद दो लोग उसकी शॉप की देखभाल कर रहे थे.

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इन दो महीनों में, लुटेरों ने रात में 40 फ़ीट लंबी और 3 फ़ीट चौड़ी सुरंग खोद दी. वो मलबे को इकट्ठा करते और सुबह बिल्डिंग के पास में ही पड़े खाली मैदान में फ़ेंक देते. उनके ऊपर वाले फ़्लोर में रहने वाले लोगों को कभी किसी तरह की सुरंग की भनक नहीं लगी. सुरंग को देखकर लगता है कि इन लोगों ने इतना मलबा निकाला था कि कम से कम बीएमसी के चार, 8 टन मलबे वाले डंपर भर जाते.

पुलिस का कहना है कि ये एक योजनाबद्ध तरीके से की गई लूटपाट है और इसमें कई लोग शामिल हैं. इन लोगों को बैंक के लेआउट का भी पूरा अंदाज़ा था हालांकि, ये शातिर चोर बैंक के ट्रेज़री रूम में रखा मेन सेफ़ वॉल्ट नहीं खोल पाए थे. पुलिस को इन लुटेरों के मिट्टी में सने फुटप्रिंट्स भी मिले हैं.

नवी मुंबई के डीसीपी सुधाकर पथारे ने कहा कि हमें शक है कि ये लूटपाट भी झारखंड के एक गैंग द्वारा की गई है. इससे पहले मई 2017 में नेरूल में मयूरा ज्वेलर्स को लूटने के लिए कुछ इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया गया था.

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पुलिस ने कहा कि बैंक के आसपास के क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरा ज़रूर था लेकिन लॉकर रूम में ऐसा नहीं था. बैंक के एकदम बाहर यानि बिल्डिंग के गेट के पास लगे कैमरे से कुछ तस्वीरें मिली ज़रूर है लेकिन ये साफ़ नहीं है, ऐसे में लुटेरों का पहचानना मुश्किल है.

संपदा पुलिस स्टेशन के सीनियर इस्पेंक्टर सूरज पद्वी ने कहा कि कई बैंक ग्राहकों से सलाह करने के बाद ये सामने आया है कि 1.5 करोड़ के कीमती सामानों को चुरा लिया गया है.

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