क्रिकेट में हर बड़े खिलाड़ी की अपनी एक ख़ासियत होती है. यही ख़ासियत उनकी पहचान बन जाती है. अपने शानदार खेल के कारण सचिन को 'मास्टर ब्लास्टर' तो द्रविड़ को 'द वॉल' के नाम से आज भी जाना जाता है. वहीं टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को क्रिकेट जगत में 'God Of The Offside' के नाम से पहचान मिली.

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अधिकतर लोग सौरव गांगुली को प्रिंस ऑफ़ कोलकाता या फिर दादा के नाम से जानते हैं, लेकिन क्रिकेट को समझने वाले उन्हें 'God Of The Offside' के नाम से जानते हैं. वो इसलिए क्योंकि Offside में शॉट खेलने की जो कला सौरव गांगुली के पास थी वो शायद ही दुनिया के किसी अन्य बल्लेबाज़ के पास होगी.

अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर दादा को ये नाम किसने दिया होगा. तो बता दें कि दादा को ये नाम एक ऐसे खिलाड़ी ने दिया है जिनके पास ख़ुद भी इसी तरह की उपलब्धि थी. वो शख़्स है 'द वॉल' के नाम से मशहूर राहुल द्रविड़.

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द्रविड़ ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि 'अगर Offside का कोई गॉड है, तो वो हैं सौरव गांगुली'. अब आप ही अंदाज़ा लगा सकते हैं कि क्रिकेट की बेहतरीन समझ रखने वाले राहुल द्रविड़ जब ख़ुद मानते हों कि Offside पर दादा से बेहतरीन प्लेयर कोई और नहीं था, तो उनकी बातों पर सौ फ़ीसदी यकीन किया जा सकता है.

एक क्रिकेट फ़ैन के तौर पर कहूं तो मैंने आज तक Offside में गांगुली से बेहतरीन किसी अन्य खिलाड़ी को खेलते हुए नहीं देखा. उस दौर में दुनिया का हर बड़ा गेंदबाज़ दादा को Offside में गेंदबाज़ी करने से डरता था. ग़लती से अगर ऐसा होता भी तो गेंद फ़ील्डरों को छकाते हुए सीमा रेखा के पार जाती हुई दिखती थी. सिर्फ़ इतना ही नहीं दादा के वो बेहतरीन टाइमिंग वाले स्ट्रेट छक्के आज भी मुझे अच्छे से याद हैं.

एक दशक पहले गांगुली और द्रविड़ की जोड़ी वर्ल्ड क्रिकेट की सबसे बेहतरीन जोड़ियों में से एक थी. गांगुली ओपनर के तौर पर खेलते थे, तो द्रविड़ फ़र्स्ट डाउन बल्लेबाज़ी करने आते थे. ओपनिंग जोड़ी टूटने के बाद गांगुली और द्रविड़ मैदान पर गेंदबाज़ों के पसीने निकाल दिया करते थे. उस दौर में इन दोनों ने कई बड़ी साझेदारियां कर भारत को जीत दिलाई थी.

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आज से करीब 19 साल पहले 1999 के वर्ल्ड कप में श्रीलंका के ख़िलाफ़ 6 रन पर पहला विकेट खोने के बाद गांगुली और द्रविड़ ने दूसरे विकेट के लिए 318 रन की शानदार साझेदारी की थी.

इन दोनों महान खिलाड़ियों की एक और ख़ास बात ये है कि 20 जून, 1996 को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ इन दोनों ने एक साथ अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी. 

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