बचपन कितना प्यारा होता है ये किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है. बचपन की वो सुनहरी यादें आंखों में एक अलग ही चमक ले आती हैं. क्यों सही कहा न? बाकियों का तो मैं नहीं कह सकती पर अपनी बात मैं कर सकती हूं कि मेरा बचपन उस दौर में गुज़रा है जिसने कई तरह के बदलावों को देखा है. 90 के दशक के बच्चों का बचपन सही में बहुत ही मज़ेदार था. उस टाइम बदलावों की क्रांति आ रही थी. फिर चाहे वो फ़िल्में हों, सीरियल्स या फिर गानों का म्यूज़िक. और उसी दौर में अपनी सफ़लता की चरम पर था टी-सीरीज़ कंपनी का नाम. 80 के दशक में टी-सीरीज़ म्यूज़िक कंपनी की नींव रखी गई थी. इस कंपनी की नींव गुलशन कुमार दुआ ने रखी थी. 80 और 90 के दशक में ऐसा कोई भी भक्ति म्युज़िक एल्बम नहीं था, जिस पर टी-सीरीज़ का ठप्पा न लगा हो.

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मुझे याद है कि पहले जब घर में पूजा होती थी, तो आरती हो या दुर्गा चालीसा या फिर हनुमान चालीसा सबको गाने की एक ही सुर, लय और ताल होती थी. लेकिन गुलशन कुमार ने हर भगवान की आरती और उनकी चालीसा को एक नया सुर-लय और नई ताल देने के साथ-साथ नया रंग भी दिया. भक्ति गीतों वाले उनके एलबम्स और भजन देखते-देखते इतने फ़ेमस हो गए कि हर घर में पूजा उनकी ही धुनों में शुरू होने लगी. मुझे तो हनुमान चालीसा गुलशन कुमार की धुन वाली ही याद है. आज भी मैं उसी धुन में हनुमान चालीसा का पाठ करती हूं. हुनमान चालीसा, दुर्गा चालीसा, हनुमान अष्टक, या अन्य सभी भगवानों की आरती या श्लोक को मधुर संगीत में पिरोने वाले वाले गुलशन कुमार ही थे. उनके बाद कई लोगों ने आरती और भजन संग्रह के कई एल्बम निकाले पर, जो फ़ील टी-सीरीज़ के भक्ति गीतों में है, वो कैसी और में नहीं. किसी भी तीर्थ स्थल पर चले जाओ ऐसा नहीं होता कि गुलशन कुमार के भजन न सुनाई दे.

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जब हम छोटे थे तब हमारे मोहल्ले के पार्क में महीने में एक बार माता का जागरण होता था, जो पूरी रात चलता था, उसमें गुलशन कुमार द्वारा गायी गयीं माता की भेटें भी बजती थीं और उस टाइम माहौल इतना भक्ति मय हो जाता था कि मानो पूछो ही मत, उसको शब्दों में बयां करना मुश्किल है. गुलशन कुमार खुद भी गायक थे और ज्यादातर भक्ति वाले गाने उन्होंने ने ही गाए हैं. उनके भक्ति गीतों में 'मैं बालक तू माता शेरा वालिए' गाना सबसे ज़्यादा हिट हुआ था.

केवल भक्ति गीतों की ही बात क्यों की जाए उनकी फिल्मों का म्युज़िक भी कमाल था. कैसेट्स एक समय ऐसा था जब कैसेट्स का बहुत चलन था, और क्योंकि कैसेट्स महंगे मिलते थे, इसलिए लोग अपने पसंदीदा गानों को खाली कैसेट्स में भरवा लेते थे. लेकिन 80 के दशक में जब कैसेट्स की दुनिया में गुलशन कुमार ने म्यूज़िक इंडस्ट्री में कदम रखा तो यही महंगे कैसेट्स आम लोगों की पहुंच तक पहुंच पाए. हालांकि, गुलशन कुमार टी-सीरीज़ शुरू करने से पहले दिल्ली के दरियागंज इलाके में अपने पिता चंद्र भान दुआ के साथ जूस की दुकान पर ही काम करते थे, बाद में उन्होंने दिल्ली में ही अपनी खुद की कैसेट्स की दुकान खोली. उसके बाद उन्होंने कैसेट्स की अपनी कम्पनी खोली और शुरुआत में वो फ़िल्मी गानों की पायरेटेड कैसेट्स सस्ते दामों में बेचते थे. उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. और देश की सबसे बड़ी म्युज़िक कंपनी बनाई. इतना ही नहीं इसके साथ ही वो फ़िल्मीं दुनिया की जानी-मानी हस्तियों में शुमार हो गए. उन्होंने कई नए सिंगर्स को भी रातों-रात आसमान में चमकने वाला सितारा बना दिया, जिसमें अनुराधा पोडवाल, सोनू निगम, कुमार सानू, जैसे बड़े सिंगर्स के नाम शामिल हैं.

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अगर उनके बारे में ये कहा जाए कि गुलशन कुमार वो नाम है जो ज़मीन से उठकर अपने बूते आसमान की बुलंदियों पर पहुंचा था, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. इसके साथ ही मैं ये भी कहूंगी कि गुलशन कुमार ने टी-सीरीज़ के जरिए संगीत को लोगों के घर-घर पहुंचाने का काम किया.

मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि बहुत से लोगों के घरों में आज भी सुबह-सुबह जो भजन बजते होंगे, वो गुलशन कुमार जी की म्युज़िक कंपनी टी-सीरीज़ में उनके द्वारा बनाये गए किसी गायक की आवाज़ में ही होते होंगे. मेरे घर में भी रोज़ यूट्यूब पर यही भजन बजते हैं क्योंकि उस मधुर संगीत वाली हनुमान चालीसा के बिना दिन की शुरुआत ही नहीं होती.

संगीत की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले गुलशन कुमार की आज बर्थ एनिवर्सरी है.