तनाव यानि डिप्रेशन एक ग्लोबल समस्या बन गया है, जो अंतत: आत्महत्या पर जाकर ख़त्म होती है. गुरुग्राम में भी ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति ने व्यक्ति ने आत्महत्या करने से पहले फ़ेसबुक लाइव किया, लेकिन किसी ने भी उसे बचाने की कोशिश नहीं की.

ये पूरा मामला गुरुग्राम के पटौदी इलाके के गांव जटोली का है. यहां के 27 वर्षीय अमित चौहान का अपनी पत्नी से झगड़ा हो गया. इसके बाद अमित की वाइफ़ बच्चों के लेकर घर छोड़ कर चली गई. इस बात से अमित इतना आहत हुआ कि उसने आत्महत्या कर ली. 

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मगर फांसी पर लटकने से पहले उसने फ़ेसबुक पर पूरी घटना को लाइव किया. इसे तकरीबन 2000 लोगों ने देखा, मगर किसी ने भी पुलिस को सूचित करने की ज़हमत नहीं उठाई. शाम को हुई इस घटना का पता पुलिस को सुबह पता चला, जब किसी शख़्स ने वीडियो को देख कर पुलिस को कॉल किया. वहीं पुलिस के पहुंचने से पहले ही उसके परिवार वाले मृतक का दाह संस्कार कर चुके थे.

इस बारे में अमित के पिता ने पुलिस को बताया कि, उनके बेटा दिमाग़ी तौर पर स्वस्थ नहीं था और पिछले 6 महीने से उसका इलाज चल रहा था. वो अकसर पत्नी और उनसे लड़ता रहता था, इसीलिए उनके पिता अमित से अलग रहने लगे थे.

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Deputy Commissioner सुमित कुहर ने बताया कि, 'ये घटना जब हुई तो अमित घर पर अकेला था. उनके घरवाले अमित की मौत के लिए किसी को भी दोषी नहीं ठहरा रहे हैं. इसलिए अभी तक कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया है.'

डिप्रेशन और आत्महत्या की इस समस्या से पूरी दुनिया जूझ रही है. World Health Organisation की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में 3.2 करोड़ लोगों ने वर्ष 2015 में आत्महत्या की थी. इसमें भारत के 18% यानि 5.7 करोड़ लोग थे. मतलब साफ़ है समस्या काफ़ी गंभीर है.

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आलम ये है कि हमारी सरकार हेल्थ बजट का 0.06% मानसिक स्वास्थय पर ख़र्च करती है, जबकि बांग्लादेश इसी मद में 0.44% ख़र्च करता है. विकसित देश अपने बजट का 4 फ़ीसदी हिस्सा मानसिक स्वास्थ्य, उससे जुड़ी रिसर्च आदि पर लगाते हैं. यानि के हमें इस क्षेत्र में अभी काफ़ी लंबा फ़ासला तय करना है. 

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