पुलिस स्टेशन का नाम आते ही किसी के भी मन में.एक अज़ीब सी बेचैनी होने लगती हैं और हो भी क्यों न. पुलिस स्टेशन एक ऐसी जगह है, जहां किसी का भी अच्छा टाइम नहीं बीतता है, खासतौर पर पारिवारिक मामलों के कारण माता-पिता के साथ आये बच्चों का. शायद इसलिए गुरुग्राम में स्थित एक महिला पुलिस स्टेशन ने पेरेंट्स के साथ आये बच्चों के लिए एक नेक कदम उठाया है. ताकि यहां आने वाले बच्चों को तनावपूर्ण माहौल का सामना न करना पड़े.

Source: hindustantimes

गुरुग्राम के सेक्टर 51 में स्थित महिला पुलिस स्टेशन के एक साइड में दो कमरे बनवाये गए हैं, जहां जाकर बच्चे खेल-कूद सकते हैं. इन रूम्स को इन्होनें 'फुलवारी' नाम दिया है और इसको बहुत सारे खिलौनों से सजाया गया है. खिलौनों के अलावा यहां तरह-तरह के पज़ल्स और गेम्स को भी रखा गया है, ताकि बच्चे अपनी इच्छानुसार खेलने के लिए गेम चुन सकें. इन रूम्स को बनवाने के पीछे मुख्य कारण है कि पारिवारिक मामलों के कारण पुलिस स्टेशन आये बच्चों को नकारात्मक वातावरण से दूर रखा जा सके.

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वैसे भी पुलिस स्टेशन का गंभीर माहौल खासतौर पर बच्चों के लिए घातक साबित हो सकता है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए कि बच्चों को यहां पर डर न लगे ये प्लेरूम्स बनाये गए हैं, जिनकी दीवारों पर तरह-तरह के प्रेरणादायक कोट्स लिखे गए हैं. साथ ही यहां उनके पढ़ने के लिए कहानियों की किताबें भी रखी गयीं हैं, ताकि बच्चे उनमें ही बिज़ी रहें. बच्चों के लिए बनायी गयी इस फुलवारी में पुलिस स्टेशन के उन कर्मचारियों जो यहां 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहते हैं, के बच्चों के लिए एक क्रेच के तौर पर भी यूज़ होती है.

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हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के हवाले से, पुलिस स्टेशन के एसीपी धरना यादव ने कहा,

'कई बार ऐसा होता है कि बहुत से केसेज़ में बच्चे ही पीड़ित होते हैं और आमतौर पर पुलिस स्टेशन के गंभीर माहौल में वो अपनी आपबीती बताने में सहज महसूस नहीं करते हैं. ये प्ले एरिया उनको एक ऐसा माहौल प्रदान करता है जहां वो खो जाते हैं और डर को महसूस नहीं करते हैं. ऐसे में उनसे बात करना आसान हो जाता है.'

ये प्लेरूम्स खासतौर पर 8-12 साल तक के बच्चों के लिए हैं और यहां पर उनकी देख-रेख करने के लिए एक आया हमेशा मौजूद रहती है. आपको ये जानकर ख़ुशी और गर होगा कि लगभग 400 महिला पुलिस ऑफ़िसर्स ने इसके लिए क्राफ्ट का सामान, खिलौने, पज़ल्स और कई चीज़ें दी हैं इन कमरों को खूबसूरत बनाने के लिए.

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इसके साथ ही एसीपी कहते हैं कि हर दिन करीब 8 से 10 बच्चे अपने पेरेंट्स के साथ पुलिस स्टेशन आते हैं. अपने पेरेंट्स के साथ यहां आने वाले ज़्यादातर बच्चे टीनएजर्स होते हैं और अच्छे से समझते हैं कि उनके साथ या उनके घर में हुआ क्या है. और हमारी कोशिश है कि जब तक वो पोलिस स्टेशन में रहें तब तक वो अपना समय फुलवारी में रह कर कुछ क्रिएटिव काम करने में लगाएं.