बॉलीवुड के सबसे काबिल लेखकों में शुमार प्रसून जोशी आज सेंसर बोर्ड के चीफ़ हैं. सन् 1971 में उत्तराखंड के अल्मोड़ा में पैदा होने वाले प्रसून को बचपन से ही लिटरेचर में काफी दिलचस्पी थी. उन्होंने बताया कि एक बार जब उनके स्कूल में फैंसी कॉम्पिटिशन था, तब सब बच्चे एक्टर, पॉलिटिशयन या क्रांतिकारी की ड्रेस पहनकर आए थे, मगर वो एक कवि बनकर पहुंचे थे. 17 साल की उम्र में उनकी पहली किताब ‘मैं और वो’ भी प्रकाशित हो गई थी.

प्रसून जोशी को लिखने का बहुत शौक था. और उन्होंने ये तय भी कर लिया था कि वो भविष्य में लेखक ही बनेंगे. बचपन में प्रसून ने कवि का किरदार ज़रूर निभाया था, लेकिन उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि वो सच में इतने बड़े कवि बनेंगे.

प्रसून कवि के साथ-साथ एक बहुत ही बड़े लेखक भी है. उन्होंने 17 वर्ष की उम्र में उनकी पहली किताब ’मैं और वो’ लिखी थी. फिर उन्होंने विज्ञापन जगत में कदम रखा. प्रसून ने अपने करियर की शुरुआत एक विज्ञापन और पब्लिक रिलेशन कंपनी से की जहां उन्होंने तक़रीबन 10 साल तक काम किया. विज्ञापन जगत में काम करते हुए प्रसून ने कई विज्ञापन भी लिखे थे. एनडीटीवी की ’सच दिखाते हैं हम’ और कोकाकोला की ’ठंडा मतलब कोकाकोला’ जैसी पंचलाइन भी प्रसून ने ही लिखी थी.

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उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजकुमार संतोषी की फ़िल्म लज्जा से की थी. इस फ़िल्म को दर्शकों का तो नहीं, लेकिन आलोचकों ने खूब सराहा था. इस फ़िल्म के बाद ही उन्हें यश चोपड़ा की फ़िल्म 'हम तुम' में काम करने का मौका मिला था, उसके बाद प्रसून बॉलीवुड में स्थापित हो गए.

प्रसून ने 'भाग मिल्खा भाग' जैसी सुपर हिट फ़िल्म और कई बेस्ट फ़िल्मों की कहानी लिखी. दिल्ली में ही एक कंपनी में काम करने के दौरान प्रसून की मुलाकात अपर्णा से हुई. और फिर कई मुलाकातों के बाद प्रसून और अर्पणा ने शादी कर ली. दोनों की एक बेटी है जिसका नाम ऐशन्या है. प्रसून जोशी की मेहनत और लगन से ही उन्होंने लेखक से लेकर विज्ञापन, डायलॉग, लिरिक्स, स्क्रिप्ट राइटर और अब सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष तक का सफ़र पूरा किया. प्रसून फ़िल्म तारे ज़मीं पर और चित्तागौंग के लिए दो बार नेशनल अवार्ड जीत चुके हैं. 2015 में उन्हें आर्ट और लिटरेचर के लिए पदमश्री से भी नवाज़ा गया था.