टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को भारतीय क्रिकेट का सबसे सफ़ल कप्तान माना जाता है. वो सौरव गांगुली ही थे, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट को अग्रेसिव क्रिकेट खेलने की प्रेरणा दी. तेज़ गेंदबाज़ों को अग्रेशन के साथ गेंदबाज़ी करना और फ़ील्डरों को विपक्षी बल्लेबाज़ों पर दबाव बनाना भी गांगुली की ही देन है. जब भी टीम इंडिया मुसीबत में होती, गांगुली ख़ुद आगे आकर ज़िम्मेदारी लेते थे. ये बात सच है कि गांगुली अग्रेसिव क्रिकेट खेलना पसंद करते थे. लेकिन टीम इंडिया में एक ऐसा खिलाड़ी भी था, जो शानदार गेंदबाज़ होने के साथ-साथ अग्रेसिव क्रिकेट खेलने में भी माहिर था.

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सौरव गांगुली के बाद अगर किसी भारतीय क्रिकेटर ने असल में अग्रेसिव क्रिकेट खेलने की परम्परा शुरू की, तो वो थे हरभजन सिंह. भज्जी पंजाब से हैं और पंजाबियों के तो ख़ून में ही अग्रेशन होता है. अग्रेशन असल में तेज़ गेंदबाज़ों में ही देखने को मिलता है. लेकिन भज्जी दुनिया के एकमात्र ऐसे स्पिनर हैं, जिन्होंने पूरी ज़िंदगी अग्रेसिव क्रिकेट ही खेली.

विकेट लेने के बाद ख़ुशी मनाने का तरीका हो, या फिर बैटिंग और फ़ील्डिंग करते वक़्त विपक्षी टीम के खिलाड़ियों पर शब्दों से दवाब बनाना, भज्जी का नेचर कुछ ऐसा ही था. इस नेचर की वजह से उनको कई बार मैदान पर मुसीबतों का सामना भी करना पड़ा. वो मैदान पर कुछ न भी करते, तो भी किसी न किसी विवाद में उनका नाम आ ही जाता था.

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हरभजन पहली बार उस समय सुर्ख़ियों में आये, जब साल 1998 में मात्र 17 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहली वनडे सीरीज़ खेलने का मौका मिला. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए एक मैच के दौरान, हरभजन की गेंद पर पॉन्टिंग स्टंप्ड हो गए. विकेट लेने के बाद भज्जी ने जोश में पोंटिंग को कुछ कह दिया और दोनों के बीच बहस हो गयी. पहली ही सीरीज़ में हरभजन को एक वनडे का बैन भी झेलना पड़ा था और मैच फ़ीस भी गंवानी पड़ी.

इसके बाद भज्जी सौरव गांगुली के चहेते खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल हो गए. गांगुली ने उन्हें लगातार मौके दिए और हरभजन अपने शानदार प्रदर्शन से स्टार खिलाड़ी बन गए. साल 2001 में ऑस्ट्रेलियाई टीम जब भारत दौरे पर आई, तो उस वक़्त हरभजन ने मुख़्य गेंदबाज़ के तौर पर पूरी सीरीज़ के दौरान कुल 32 विकेट लिए थे. इस सीरीज़ में ऑस्ट्रलिया को करारी हार झेलनी पड़ी थी. बस यहीं से भारतीय क्रिकेट में हरभजन सिंह का नया दौर शुरू हुआ.

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समय बीतता गया और भज्जी की गिनती दुनिया के बेहतरीन गेंदबाज़ों में होने लगी. इस बीच उनकी क्रिकेटिंग लाइफ़ में कई ऐसे दौर भी आए, जब उन्हें विवादों का सामना करना पड़ा. लेकिन भज्जी सबको दरकिनार करते हुए टीम इंडिया को जीत दिलाते रहे और कई मौक़ों पर भारत को ऐतिहासिक जीत भी दिलाई.

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साल 2005 में ग्रेग चैपल को भारतीय टीम का मुख़्य कोच नियुक्त किया गया. लेकिन कुछ ही समय बाद कप्तान गांगुली और कोच चैपल के बीच विवाद होने लगे. जब चैपल मनमानी करने लगे, तो हरभजन ही वो पहले खिलाड़ी थे, जिन्होंने खुलकर चैपल के व्यवहार के लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से लताड़ा था.

मैदान पर कोई भज्जी को छेड़े, तो भज्जी फिर उसे नहीं छोड़ते. चाहे वो शोएब अख़्तर पर छक्का मारना हो, या फिर डेल स्टेन पर. जिसने भी भज्जी को चैलेंज किया, भज्जी ने उसकी गेंदों को सीमारेखा से बाहर किया. भज्जी मैदान पर जितने अग्रेसिव लगते हैं मैदान के बाहर उतने ही मस्तमौला भी हैं. सचिन से लेकर सौरव और धोनी से लेकर विराट सभी भज्जी को टीम इंडिया का सबसे बड़ा एंटरटेनर मानते हैं. डांस करना हो या फिर कॉमेडी, भज्जी टीम इंडिया की जान हैं.

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हरभजन अब तक भारत के लिए तकरीबन 700 अंतर्राष्ट्रीय विकेट ले चुके भज्जी में आज भी काफ़ी क्रिकेट बची हुई है. टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले भज्जी पहले भारतीय खिलाड़ी हैं. जबकि मुरलीधरन के बाद हरभजन दुनिया के दूसरे ऑफ़ स्पिनर हैं, जिन्होंने सर्वाधिक विकेट लिए हैं.

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हरभजन सिंह ने साल 1998 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत की थी. भारत के लिए खेलते हुए उन्हें आज 20 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए घरेलू क्रिकेट खेल रहे हैं. उम्मीद है कि वो हमें आगे भी अपनी क्रिकेट से एंटरटेन करते रहेंगे.