शहर हो या गांव इन दिनों हर जगह फ़ास्ट फ़ूड का चलन ज़ोरों पर है. सुबह का नाश्ता हो या फिर दोपहर का खाना हर किसी की ज़िन्दगी में फ़ास्ट फ़ूड की अहमियत कुछ ज़्यादा ही बढ़ गयी है. शहरों में पिज़्ज़ा, बर्गर और मोमोज़ खाने के लिए लोग टेस्ट के साथ भी कॉम्प्रोमाइज़ करने को तैयार रहते हैं. शहरों में लाख ढूंढने के बाद ही कहीं कुछ टेस्टी फ़ास्ट फ़ूड मिल पाता है. यही कारण है कि लोगों को पहाड़ों की मैगी, मोमोज़, चाउमीन और चिकन सूप की याद आती है.

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एक सवाल जो मुझे हमेशा सुनने को मिलता है, वो ये कि पहाड़ों की मैगी, मोमोज़, चाउमीन और चिकन सूप इतने टेस्टी क्यों होते हैं? जब भी मेरे फ़्रेंड्स किसी हिल स्टेशन पर छुट्टियां मनाने जाते हैं, तो वापस आने के बाद उनका भी यही सवाल होता है. इस टेस्ट के पीछे भी कई कारण हैं.

1. पहाड़ों पर हर चीज़ ताज़ी मिलती है

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पहाड़ो में हर चीज़ फ़्रेश मिलती है. यही कारण है कि चाहे वो मोमोज़ हो या चाउमीन या फिर चिकन सूप उसकी क़्वालिटी काफ़ी अच्छी होती है. हिल स्टेशन होने के कारण पर्यटक अधिक आते हैं इसीलिए दुकानदारों का सामान कम समय में ही बिक जाता है. जिस कारण हर चीज़ ताज़ी-ताज़ी बनाई जाती है.

2. पहाड़ी लोगों की ईमानदारी

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सवाल यही है कि आख़िर पहाड़ों की मैगी, मोमोज़, चाउमीन और चिकन सूप इतने टेस्टी क्यों होते हैं? इसके पीछे दूसरा सबसे बड़ा कारण है पहाड़ी लोगों की ईमानदारी. पहाड़ी लोग खाने के साथ बिलकुल भी कॉम्प्रोमाइज़ नहीं करते. शहरों में हमें चिकन मोमोज़ बोलकर न्यूट्रेला बड़ी वाले मोमोज़ परोस दिए जाते हैं. मोमोज़ के अंदर चिकन का एक छोटा सा टुकड़ा भी नहीं होता. चिकन सूप का भी कमोबश यही हाल होता है. लेकिन पहाड़ों में मोमोज़ और चिकन सूप सिर्फ़ और सिर्फ़ चिकन के ही बनाये जाते हैं.

3. देसी पहाड़ी मसाले

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जहां तक बात टेस्ट की है, तो डेली इस्तेमाल होने वाले मसालों के अलावा भी पहाड़ों में कई प्रकार के देसी मसाले पाए जाते हैं, जो खाने को स्वादिष्ट बनाते हैं. इन मसालों का टेस्ट अन्य मसालों से एकदम अलग होता है. जिनमें टिमरू के बीज, भांग के बीज, चुवर, अतीश और भंगजीरा जैसे कुछ देसी मसाले हैं, जो पहाड़ी खाने को और भी लज़ीज़ बनाते हैं. मैगी, मोमोज़ और चिकन सूप में भी यही मसाला इस्तेमाल किया जाता है.

4. पहाड़ों का मौसम

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टेस्ट के लिए पहाड़ों का सुहाना मौसम भी सबसे बड़ा कारण है. 45 डिग्री वाले तापमान में आप टेस्टी सूप का मज़ा नहीं ले सकते. जबकि पहाड़ों में इसी मौसम में आप गरम-गरम सूप का मज़ा ले सकते हैं और बारिश के मौसम में मसाला मैगी का आनंद ले सकते हैं.

वैसे तो हर पहाड़ी इलाक़े में मैगी, मोमोज़, चाउमीन और चिकन सूप टेस्टी ही मिलता है. लेकिन देहरादून, नैनीताल और कसोल की मैगी की बात ही अलग है. देहरादून से मसूरी जाते वक़्त आपको कई मैगी पॉइंट्स मिल जायेंगे, जो अपनी स्वादिष्ट मैगी के लिए दूर-दूर तक जाने जाते हैं.

5. पहाड़ों के सुन्दर नज़ारों के साथ मैगी का मज़ा

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हर शहर के मैगी पॉइंट्स की अपनी एक पहचान होती है. देहरादून के मैगी पॉइंट्स की भी अपनी अलग ही कहानी है. अगर आप देहरादून से होते हुए मसूरी जाएं, तो आपको यहां पर ऐसे कई मैगी पॉइंट्स दिखेंगे,जो अपने ही अंदर कई कहानियां समेटे हुए हैं. जो मैगी दो मिनट में तैयार हो जाती है उसके लिए लोगों को इन मैगी पॉइंट्स पर 1 घंटे तक का इंतज़ार करना पड़ता है.

6. मैगी के साथ गरम-गरम चाय

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इन मैगी पॉइंट्स से देहरादून घाटी का शानदार नज़ारा देखने लायक होता है. मैगी के साथ गरम-गरम चाय पीने का मज़ा ही अलग है. कुछ ऐसा ही नज़ारा नैनीताल के मैगी पॉइंट्स का भी रहता है. यहां वीकेंड पर आप कामकाज़ी लोगों, जबकि अन्य दिनों में युवाओं की भीड़ देख सकते हैं. पहाड़ों के सुन्दर नज़ारों के साथ मैगी और मोमोज़ खाने की बात ही निराली है.

यही सब चीज़ें हैं, जो पहाड़ों की मैगी, मोमोज़, चाउमीन और चिकन सूप को और भी टेस्टी बनाती हैं.