ओलंपिक में खेल रहा हर खिलाड़ी अपने से पहले अपने देश के लिए जीतना चाहता है. हर जीत के साथ खिलाड़ी का मान बढ़ता है और देश का सम्मान. हर भारतवासी की छाती चार इंच और बढ़ जाती है जब अपने देश के झंडे तले पदकों की संख्या बढ़ती दिखती है. रियो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों का दम दिख रहा है. वर्षों की जी तोड़ मेहनत का इनको मेडल तो मिलता है पर कोई इनामी रकम नहीं मिलती.

अपने देश के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई देश अपने खिलाड़ियों को राष्ट्रीय सम्मान के साथ इनामी राशि प्रदान करते हैं. इनमें से कई देशों की इनामी राशि इतनी है कि खिलाड़ियों को आजीवन कुछ न करना पड़े पर, कुछ देशों की इतनी होती है कि एक बार खिलाड़ी भी बोल दे, 'भाई आप ही रख लो'. अच्छी बात ये है कि भारत की इनामी राशि अमेरिका, चीन, जापान समेत कई देशों से ज़्यादा है और बुरी बात ये है कि नेपाल की इनामी राशि भारत से भी ज़्यादा है.

इस इनामी राशि के अलावा कई देश अपने खिलाड़ियों को कुछ इंसेन्टिव भी देते हैं, जैसे भारत में जीते हुए खिलाड़ियों को कोच की नौकरी दी जाती है. इसके अलावा UK अपने खिलाड़ियों को इनामी राशि नहीं देता, पर सम्मान के रूप में अपने डाक टिकट पर उनकी तस्वीर ज़रूर छपवाता है. 

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