दो दशक पहले आई जंगल बुक आज भी कई लोगों के ज़हन में ताज़ा है. भेड़ियों के बीच पले-बढ़े मोगली के लिए शेरखान हमेशा किसी न किसी तरह की परेशानी खड़ा किया करता था. इसी शो के दौरान ही शायद कई लोग पहली बार लकड़बग्गों से रूबरू हुए थे. इनमें से एक लकड़बग्घा शेर खान का ख़ास चमचा था, जो मोगली को फ़ंसाने के लिए कई चालें चलता रहता था.

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ये लकड़बग्घे भले शेर खान से डरते थे, पर जंगल में रहने वाली कई प्रजातियां, यहां तक कि इंसान भी इनसे ख़ौफ़ खाते हैं. लेकिन अफ़्रीका में सबसे पहले आज़ाद होने वाले देश इथोपिया में इनकी कहानी कुछ और ही है.

पूर्वी इथोपिया के एक प्राचीन शहर हरार में ये लकड़बग्घे बेधड़क बेखौफ़ घूमते हैं.

लकड़बग्घे खतरनाक होते हैं लेकिन इस क्षेत्र में रहने वाले लोग इन जानवरों से नहीं डरते. यहां मौजूद कई लकड़बग्घों के चलते गांव के लोगों ने इनकी देखभाल करने का फ़ैसला किया था.

गांव के लोगों ने आपस में मिलकर एक परिवार को चुना और इस परिवार के लोगों को लकड़बग्घों को खाना खिलाने की ज़िम्मेदारी सौंपी. 23 साल का अब्बास यूसुफ़ हर रोज़ लकड़बग्घों को खाना खिलाता है. अब्बास ने अपने पिता से लकड़बग्घों को खाना खिलाने की कला सीखी थी.

अब्बास के पिता युसूफ़ सालेह ने अपने जीवन के 45 साल लकड़बग्घों को खाना खिलाया था. इसके बाद उन्होंने ये काम अपने बेटे को सौंप दिया था. अब्बास पिछले 13 सालों से इन जानवरों को खाना खिला रहे हैं. इसी के चलते उन्हें Hyena Man भी कहा जाने लगा है. ये Hyenas शहर के बाहर मौजूद गुफ़ाओं में रहते हैं. इस तस्वीर में लकड़बग्घे अपने Hyena Man का इंतज़ार करते हुए.

अब्बास, लकड़बग्घे के बच्चे के साथ.

अब्बास का ये काम, लोगों के लिए दिलचस्पी की वजह बन गया है. अब्बास जब भी इन लकड़बग्घों को खाना खिलाते हैं तो पर्यटक बड़ी उत्सुकता से उसे देखने लगते हैं. लोगों में इन जानवरों के प्रति डर खत्म करने के लिए अब्बास एक अनूठा तरीका अपनाता है. वो अपने मुंह से ही इन जानवरों को खाना खिलाता है.

ये शख़्स एक मीट बाज़ार के सामने पक्षियों को खाना खिलाने की तैयारी कर रहा है.

27 साल के मोहम्मद अमन अपनी कॉफ़ी शॉप के सामने ब्रेकफ़ास्ट बनाते हुए.

इस लकड़बग्घे की जब तस्वीर खींचने की कोशिश की गई, तो उसने कुछ ऐसी प्रतिक्रिया दी.

वाकई, अब्बास जैसे लोग साबित करते हैं कि अगर सही तरीके से देखभाल की जाए तो जंगली जानवरों को भी दोस्त बनाया जा सकता है.

Source: IndiaTimes