आजकल दोस्तों के साथ पार्टी हो या फ़ैमिली के साथ बाहर जाकर खाना पिज़्ज़ा-बर्गर सबकी पहली पसंद बन चुके हैं. पिज़्ज़ा, बर्गर, चाइनीज़ और कई तरह के जंक फ़ूड के नाम से आजकल बच्चे हों या बड़े सबके मुंह में पानी आ जाता है. बाहर खाना हो तो बच्चे पिज़्ज़ा, बर्गर की तरफ ही भागते हैं. ऐसा ही कुछ मेरे परिवार में भी है. जब भी हम सारे भाई-बहन इकट्ठे होकर कहीं बाहर खाने जाने का प्लान बनाते हैं, तो सबसे पहले खाने के लिए जो डिमांड होती है वो पिज़्ज़ा, बर्गर, चाइनीज़ आदि की ही होती है. लेकिन मेरी पसंद होती है घर का दाल-चावल. लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है कि मुझे ये सब चीज़ें पसंद नहीं हैं.

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अपने दोस्तों और कज़न्स के साथ मैं ये सब चीज़ें खा भी लूं, लेकिन अगर मेरी पसंद के बारे में पूछा जाए तो अगर मेरे सामने एक तरफ जीरा-हींग का छौंका लगी दाल, चावल, रोटी और सब्ज़ी हो और दूसरी तरफ ये सारे जंक फ़ूड, तो मैं घर का सादा दाल-चावल खाना पसंद करूंगी. हां, मैं होटल या रेस्टोरेंट में मिलने वाले दाल-चावल को भी पिज़्ज़ा-बर्गर के सामने ज़्यादा स्वाद से खाऊंगी। क्योंकि मैं देसी हूं और मुझे देसी खाना ही पसंद है. और मुझे इसमें कोई बुराई नज़र नहीं आती.

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मेरी इस बात पर मेरे दोस्तों का कहना होता है,

जब तू हमारे साथ आया कर तो अपना डिब्बा घर से ही लाया कर...

हम सब तो पिज़्ज़ा ही खाएंगे...

तू खुश रह अपने दाल-चावल में!

अगर हम बात करें मां के हाथ के खाने की, तो मैं यहां एक बात कहना चाहूंगी कि हर किसी को अपनी मां के हाथ का खाना याद होगा जिसमें दाल-चावल तो होता ही था. आखिर बचपन से मम्मी के हाथ के बने दाल-चावल और सब्ज़ी-रोटी खाकर ही तो हम बड़े हुए हैं. उसे कैसे भूल सकते हैं. घर का खाना जितना पौष्टिक और सेहतमंद होता है, बाहर मिलने वाला पिज़्ज़ा-बर्गर नहीं होता. अब अगर स्वाद की बात की जाए तो भी मैं यही कहूंगी कि साधारण सी दाल और चावल में जो स्वाद होता है, वो पिज़्ज़ा-बर्गर जैसे पैकेज़्ड फ़ूड में नहीं.

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हालंकि, बहुत सारे पिज़्ज़ा, बर्गर लवर्स को मेरी ये बात सुनने के बाद ख़राब लगा होगा और वो मुझे पुराने ज़माने का या फिर बैकवर्ड समझें लेकिन मुझे इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि वो मेरे बारे में क्या सोचेंगे या बोलेंगे. हां मुझे घर का बना दाल-चावल ही पसंद है और उसके आगे मैं ये विलायती खाना बेझिझक छोड़ सकती हूं. और मैं ऐसा क्यों न करूं?

हां मुझे पसंद है घर का सादा खाना और ये कहने में मुझे कोई शर्मिंदगी नहीं है.

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