भारतीय अमेरिकी बिज़नसमैन और रिपब्लिकन हिंदू गठबंधन (आरएचसी) के संस्थापक शलभ कुमार ने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और भारत के पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बारे में कहा है कि दुनिया के इन दो शक्तिशाली नेताओं के लिए भले ही अपना देश सर्वप्रथम वरीयता पर हो, लेकिन इसके बावजूद भारत और अमेरिका आने वाले समय में व्यापार की नई ऊंचाइयां छू सकते हैं.

शलभ ने कहा कि "अमेरिका और भारत के बीच व्यापार बढ़ाना मेरी सबसे मुख्य प्राथमिकता होगी. संतुलित व्यापार के सहारे दोनों देशों में नई नौकरियों को बढ़ाने में मदद मिलेगी और साथ ही दोनों देशों में निवेश के अवसरों को भी बढ़ाया जाएगा."

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गौरतलब है कि अमेरिकी प्रेज़िडेंट, डोनाल्ड ट्रंप का चीन के प्रति सख्त रवैया और असंतुलित व्यापार पर लगाम लगाने की कोशिशों के चलते भारत को फायदा मिलने के अनुमान लगाए जा रहे हैं. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को 100 बिलियन डॉलर से बढ़ा कर 300 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना शलभ का लक्ष्य होगा. शलभ को उम्मीद है कि डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल खत्म होने तक वे अपने इस टारगेट को प्राप्त कर लेंगे.

शलभ इसके अलावा ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की भी तैयारियां कर चुके हैं. उनका मानना है कि अगर ट्रंप दूसरे कार्यकाल के लिए भी चुने जाते हैं तो भारत और अमेरिका के बीच कारोबार को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना उनका मकसद होगा. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का अमेरिकी और स्वदेशी चीज़ों को लेकर सकारात्मक रूख और भारत के पीएम मोदी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'मेक इन इंडिया' दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को मज़बूत ही करेगा.

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कुमार ने कहा कि "मोदी और ट्रंप दोनों ही अपने अपने देशों की जॉब ग्रोथ और निवेश को वरीयता देते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बाकी देशों के साथ बिजनेस को लेकर हम उत्साहहीन बने रहेंगे. दोनों देशों की कुछ आपसी जरूरतें हैं और अमेरिका आने वाले समय में डिफेंस, एनर्जी, न्यूक्लियर और तकनीकी क्षेत्रों में निर्यात बढ़ा सकता है वहीं भारत अपने मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस में अपना निर्यात बढ़ा सकता है."

अगर इस द्विपक्षीय व्यापार को मजबूती मिलती है तो जाहिर है दोनों ही देशों में नौकरी के अवसरों में काफी वृद्धि होने की संभावना है. गौरतलब है कि शलभ कुमार के बीजेपी और आरएसएस के साथ करीबी रिश्ते हैं. कुमार ने प्रेज़िडेंशल कैंपेन के दौरान ट्रंप के लिए न्यू जर्सी में एक रैली का भी आयोजन किया था और ट्रंप के कैंपेन के लिए 6 करोड़ रुपये चंदे में दिए थे.

इससे पहले भी ट्रंप पीएम मोदी और भारत के बारे में काफी सकारात्मक बयान दे चुके हैं. अक्टूबर में आयोजित एक रैली के दौरान ट्रंप ने अपने आपको इंडियन अमेरिकी और हिंदू समुदाय का दोस्त बताया था और साथ ही नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की थी. इस रैली के मुख्य कर्ताधर्ता भी शलभ कुमार ही थे.

पिछले हफ्ते जब राष्ट्रपति ट्रंप के उद्घाटन समारोह में डोनेशन देने वाले खास लोगों और वीवीआईपी के लिए डिनर का आयोजन किया गया था तो उस दौरान ट्रंप ने शलभ कुमार की फैमिली और आरएचसी के सदस्यों के साथ काफी वक्त भी बिताया था और इस संस्थान के सदस्यों को राष्ट्रपति चुनाव के दौरान की गई शानदार कैपेंनिंग के लिए शुक्रिया अदा भी किया था.

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गौरतलब है कि ट्रंप ने प्रशासन में तीन हाई प्रोफाइल पोजीशंस के लिए इंडियन अमेरिकन और हिंदुओं को जगह दी है, साथ ही उन्होंने दो और भारतीयों को व्हाइट हाउस में अच्छी पोजिशन पर नौकरी दी है. शलभ का मानना है कि ट्रंप के ये फैसले ये दर्शाने के लिए काफी हैं कि वे हिंदू समुदाय के एक अच्छे दोस्त साबित होंगे.

ऐसा पहली बार है कि एक कैबिनेट स्तर की पोज़ीशन पर एक अमेरिकन इंडियन, निक्की हेली का चुनाव किया गया है. वहीं अजीत पाई को फेडरल कम्युनिकेशन कमिशन का चेयरमैन और सीमा वर्मा को सरकारी हेल्थ इंश्योरेंस प्रोग्राम का हेड बनाया गया है.

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इसके अलावा ट्रंप ने उत्तम ढिल्लों नाम के वकील को अपना स्पेशल अस्सिटेंट, वहीं राज शाह को रिसर्च डायरेक्टर के तौर पर रखा गया है. उन्होंने कहा कि ट्रंप की टीम ने आरएचसी के सदस्यों को उम्मीदवारों की सूची भेजने को भी कहा है ताकि अमेरिका के नए प्रशासन में लोगों की भर्ती की जा सके. उम्मीद है कि ट्रंप और मोदी की ये जुगलबंदी केवल जुमला भर न होकर सही मायनों में आम आदमी के लिए हितकर साबित होगी.

Source: The Financial Express