देश जब भी मुसीबत में होता है भारतीय सेना का एक-एक जवान अपनी जान हथेली पर रखकर हमारी मदद को तैयार रहता है. आज अगर हम अपने घरों में सुरक्षित हैं, तो सिर्फ़ और सिर्फ़ इन जवानों के साहस और बलिदान की वजह से. देश किसी भी मुसीबत में हो आर्मी हर जगह मौजूद होती है. इन जवानों पर ये हमारा अटूट विश्वास ही है कि चाहे बाढ़ आये या फिर भूकंप हम इन पर आंख बंद करके भरोसा कर सकते हैं कि ये तो हमें बचा ही लेंगे. ऐसा हमें इसलिए भी लगता है क्योंकि हालात चाहे कैसे भी हों आर्मी हर मुश्किल काम को आसान बना देती है.

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चाहे प्रिंस को गढ्ढे से निकलना हो या फिर बॉर्डर पर मुस्तैदी से आतंकियों का सफ़ाया करना, हमारे ये वीर जवान हर फ़न में माहिर हैं. जब ये बहादुर जवान हर समय निःश्वार्थ भाव से हमारी मदद को तैयार रहते हैं, तो हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता कि उनकी इस बहादुरी के किस्सों को याद किया जाये.

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आज हम भारतीय सेना के उसी साहस और निडरता की कहानी को पेश करने जा रहे हैं, जब इन वीर जवानों ने देश की मुसीबत को अपनी मुसीबत समझकर हमारी जान बचायी थी.

1- गुजरात भूकंप

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साल 2001 में जब देश गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबा था, ठीक उसी वक़्त सुबह 08:46 बजे गुजरात भूकंप से दहल उठा था. गुजरात का भुज और कच्छ ज़िले बुरी तरह भूकंप की चपेट में आ गए थे. 7.7 तीव्रता वाले इस भूकंप की तबाही में करीब 20 हज़ार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 167,000 घायल हो गए थे. इस त्रासदी के वक़्त भी मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने में सेना ने जी जान लगा दी थी. सेना के यही बहादुर जवान हज़ारों लोगों को मौत के मुंह से निकाल लाये थे.

2- सुनामी

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साल 2004 में 9.3 तीव्रता वाले भूकंप के चलते हिन्द महासागर में भयंकर सुनामी आयी थी. इससे भारत के तटवर्ती राज्यों के 34 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए थे, जिसमें तमिलनाडु और तटीय राज्यों के तकरीबन 8499 लोग मारे गए थे. इस कठिन परिस्थिति में लोगों को बचाने में भी सेना के जवान ही सबसे आगे रहे थे. इस दौरान सेना ने हज़ारों लोगों की जानें बचाई थी.

3- केदारनाथ बाढ़

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केदारनाथ त्रासदी से कौन वाक़िफ़ नहीं है. 16 जून 2013 की वो भयानक रात जब सभी श्रद्धालु बाबा केदारनाथ की शरण में थे उसी रात को एक प्रलयकारी बाढ़ ने तबाही मचाई थी. बादल फटने के चलते आयी इस बाढ़ के कारण हुई इस तबाही में तकरीबन 5 हज़ार लोगों की मौत हुई थी, जबकि हज़ारों लोग लापता और घायल हो गए थे. इस तबाही के वक़्त जब लोग भयभीत थे, तब सेना के यही जवान जान हथेली पर लेकर लोगों को नयी ज़िन्दगी दे रहे थे. भारतीय सेना के 10,000 से अधिक जवानों, कई हैलीकॉप्टर्स और नेवी के गोताखोरों ने अपनी जान की परवाह किये बग़ैर तकरीबन 110,000 से अधिक लोगों की जान बचाई थी.

4- जम्मू-कश्मीर बाढ़

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8 सितम्बर, 2014 जम्मू-कश्मीर के करीब 2,500 गांव बाढ़ में डूब गए थे. इस त्रासदी में तकरीबन 500 लोगों की मौत हो गयी थी. इस दौरान सेना के जवानों ने अपनी जान की परवाह किये बग़ैर कठिन परिस्तिथियों के बावजूद हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया था. जब वहां का जन जीवन सामान्य हो गया, तो वहां के लोगों ने ही सेना के इन जवानों का पत्थरबाज़ी से स्वागत किया. कितने दुर्भाग्य की बात है ये, सोचियेगा एक बार.

5- बिहार में भयंकर बाढ़

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अगस्त 2008 में नेपाल के कुसाहा बांध के टूट जाने के बाद कोसी नदी में आई ज़बरदस्त बाढ़ ने करीब 30 लाख लोगों को प्रभावित किया था. वैसे भी बिहार हमेशा से बाढ़ प्रभावित राज्य रहा है. हर साल हज़ारों लोग इससे प्रभावित होते हैं और सैकड़ों लोगों को जान गंवानी पड़ती हैं. इन कठिन परिस्तिथियों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में भारतीय सेना हमेशा आगे रहती है. बिहार में आयी बाढ़ में सेना अब तक हज़ारों लोगों की जान बचा चुकी है.

6- मुंबई में बाढ़

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साल 2005 में भारत की व्यावसायिक राजधानी मुंबई में आई बाढ़ ने समूचे मुंबई को झकझोर कर रख दिया था. इस बाढ़ ने अमिताभ बच्चन के घर को भी डुबो दिया था. साथ ही इस बाढ़ में लाखों लोग बेघर हो गए और कई लोगों की मौत हो गई थी. इस दौरान भी सेना ही थी, जिसने हज़ारों लोगों को इस मुसीबत से बहार निकला था.

7- लेह में बादल फटना

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अगस्त 2010 में जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र के लेह में बादल फटने से आई भयंकर बाढ़ से करीब 113 लोगों की मौत हुई थी और 160 लोग घायल हो गए थे. इस दौरान भी सेना के जवानों ने जान की परवाह किये बग़ैर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम किया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस काम में आर्मी सर्विस कोर के तीन जवान शहीद हो गए थे.

8- केरल बाढ़

पिछले कई दिनों से केरल में भयंकर बाढ़ और बारिश की वजह से जनजीवन ठप्प पड़ा हुआ है. बाढ़ की वजह से अब तक 94 लोगों की मौत हो चुकी है. सेना लगातार रहत और बचाव कार्य में लगी हुई है. सेना ने मलमपुज़ाह के वलियाकाडु गांव में 33 फ़ीट लम्बा पुल बनाकर करीब 100 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है.

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ये तो बस कुछ आंकड़े हैं, जब सेना के जवानों ने अपने अडिग साहस से हज़ारों लोगों की जान बचायी हो. जब भी देश मुसीबत में होता है सेना को याद किया जाता है. सेना बॉर्डर पर तो मुस्तैदी के साथ काम करती ही है साथ ही कोई रेल हादसा हो तो सेना, बस दुर्घटना हो तो सेना, पानी में कोई फंस जाए तो सेना, कोई आतंकी हमला हो तो सेना और कोई कुएं में गिर जाये, तो भी सेना को ही याद किया जाता है.

भारतीय सेना के ये जवान अपनी जान की परवाह किये बिना कठिन से कठिन परिस्तिथियों में काम करते हुए देश की सुरक्षा करते हैं. इनके इसी इसी जज़्बे को हमारा सलाम है.