हाल ही में गुवाहाटी में हुए टी20 मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हरा दिया. क्रिकेट फ़ैंस अभी इस हार से उबरे भी नहीं थे कि ऑस्ट्रेलियाई टीम की बस पर पत्थरबाज़ी की घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया.

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कई भारतीय क्रिकेटर्स, कमेंटेटर्स और फ़ैंस ने ट्विटर पर इस हरकत की आलोचना की लेकिन कईयों के ज़हन में कहीं न कहीं कुछ सवाल गूंज रहे थे.

क्या भारत के खिलाफ़ किसी भी टीम के मैच जीतने पर इस तरह की प्रतिक्रिया जायज़ ठहराई जा सकती है? क्या टीम इंडिया 90 के दशक की ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम में तब्दील हो चुकी है जिसे हारता देखने पर अचंभा होता था? क्या इसी के चलते क्रिकेट में भारत की हार अब नाकाबिल-ए-बर्दाश्त हो चुकी है? ऑस्ट्रेलिया टीम पर हमला कर आखिर हम कौन से 'अतिथि देवो भव' का पाठ पढ़ा रहे हैं?

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इन्हीं सवालों की जद्दोजहद के बीच कुछ ऐसे लोग भी थे, जिन्हें ये ख़बर बहुत परेशान कर रही थी. गुवाहाटी के ये लोग अपने शहर में हुई इस घटना के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम से माफ़ी मांगना चाहते थे.

बुधवार सुबह जब ऑस्ट्रेलियन टीम गुवाहाटी से निकल रही थी तो ऑस्ट्रेलियाई टीम के होटल के बाहर और LGBI एयरपोर्ट पर प्रशंसकों का हुजूम नज़र आया. ये सभी प्रशंसक हाथ में सॉरी का प्लेकार्ड लिए खड़े थे.

इन ग्रुपों में करीब 100 नौजवान थे. इनमें से ज़्यादातर कॉलेज जाने वाले छात्र भी नज़र आ रहे थे. ये लोग रैडिसन ब्लू होटल और एलजीबीआई एयरपोर्ट पर टीम का इंतज़ार कर रहे थे. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जब बस से एयरपोर्ट की तरफ़ जा रहे थे, तब कई लोगों ने चिल्लाकर प्लेयर्स को सॉरी भी कहा. कई लोगों ने असम में हुई इस घटना पर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों से ऑनलाइन माफ़ी मांगी.

जहां ऑस्ट्रेलियाई टीम का अनुभव थोड़ा खराब रहा, वहीं असम में अगले दिन इस मेहमाननवाज़ी को देखकर क्रिकेटर Moises Henriques का मूड बेहतर हो चला था.

गुवाहाटी के इन फ़ैंस ने साबित किया कि अगर देश में कुछ एंटी सोशल तत्व हैं, तो उनसे निपटने के लिए कहीं ज़्यादा संवेदनशील और सेंसिबल लोग भी हैं. अपनी गलती न होने के बाद भी लोगों ने जिस तरह का संदेश देने की कोशिश की, वो साबित करता है कि गुवाहाटी के फ़ैंस बड़े दिलवाले हैं और साबित किया कि दिल से किया गया एक छोटा सा प्रयास भी कई बार प्रभावशाली साबित होता है.

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