जब कभी भी भारतीय खेल इतिहास के सुनहरे पन्नों को पलटकर देखा जायेगा, तो साल 1948 में भारतीय हॉकी टीम की उस जीत को हमेशा टॉप पर रखा जायेगा. ये वो ऐतिहासिक पल था जब आज़ाद भारत ने पहली बार ओलंपिक में तिरंगा फ़हराया था. ये जीत इसलिए भी ख़ास थी क्योंकि जिन अंग्रेज़ों ने एक साल पहले तक भारत को गुलाम बनाया हुआ था, भारतीय हॉकी टीम ने उन अंग्रेज़ों को उन्हीं के घर में बुरी तरह हराकर ओलंपिक में गोल्ड जीता था.

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70 साल पहले 70 मिनट्स की वो जीत आज भी भारतीय खेल इतिहास की सबसे बड़ी जीत मानी जाती है. फ़ाइनल में भारत को उस टीम के ख़िलाफ़ जंग लड़नी थी, जिन्होंने हम पर कई सालों तक राज किया. ऐसे में अंग्रेज़ों को उन्हीं के घर में पटखनी देना भी किसी जंग से कम नहीं था. हुआ भी कुछ ऐसा ही भारतीय टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए ब्रिटेन को 4-0 की करारी शिकस्त दी. अंग्रेज़ों के लिए ये हार जितनी चुभनभरी थी, भारतीय टीम के लिए जीत के मायने उतने ही ख़ास थे.

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इस शानदार जीत के 3 दिन बाद हिन्दुस्तान अपनी आज़ादी की पहली वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा था. ऐसे में भारतीय टीम पहले ही अंग्रेज़ों के गढ़ में तिरंगा फ़हरा चुकी थी. इस तरह उन 11 जांबाज़ खिलाड़ियों ने देश को आज़ादी की पहली वर्षगांठ से पहले ये शानदार तोहफ़ा दिया था.

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जबकि इससे पहले ब्रिटिश टीम एक बार भारत के ख़िलाफ़ ये कहकर खेलने से इंकार कर चुकी थी कि भारत उसके उपनिवेशों में से एक है, तो वो भारत के ख़िलाफ़ नहीं खेलेंगे. मगर वो इस बार ऐसा नहीं कर सकते थे क्योंकि तब भारत आज़ाद हो चुका था. उस मैच में भारतीय खिलाडियों का जोश देखने लायक था, हर खिलाड़ी के अंदर आज़ादी की जंग में शहीद हुए अपनों का ख़ून खौल रहा था. भारतीय खिलाड़ियों ने अंग्रेज़ों को गोल करने का एक भी मौका नहीं दिया और ग्रेट ब्रिटेन को 4-0 से मात देकर ओलिंपिक में भारत को लगातार चौथा गोल्ड दिलाया.

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आज़ाद भारत को ओलिंपिक में गोल्ड दिलाने वाली उस टीम के असली हीरो थे बलबीर सिंह, जिन्होंने फ़ाइनल में 2 शानदार गोल किये थे. महान हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह आज भी उस जीत को याद करते ही भावुक हो उठते हैं.

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एनडीटीवी से बात करते हुए 94 वर्षीय बलबीर सिंह का कहना है कि ‘जीत के बाद जब हमारा राष्ट्र गान चल रहा था और तिरंगा ऊपर जा रहा था, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं भी तिरंगे के साथ उड़ रहा हूं. मुझे देशभक्ति का जो अहसास उस समय हुआ था, उसकी तुलना में दुनिया की हर बड़ी से बड़ी ख़ुशी बेहद छोटी नज़र आ रही थी. भले ही ये 70 साल पहले की बात हो, लेकिन आज भी ऐसा महसूस होता है जैसे ये कल की ही बात है.'
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बलबीर सिंह ने इसके बाद 1952 और बतौर कप्तान 1956 ओलिंपिक में भी भारतीय टीम के गोल्ड जीतने में अहम भूमिका निभाई. बावजूद इसके बलबीर सिंह के लिए 1948 का वो पल सबसे ख़ास था.

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भारत को तीन बार ओलिंपिक गोल्ड दिलाने वाले बलबीर सिंह ने कहा ‘मुझे आज भी याद है मैच शुरू होने से पहले वेम्बली स्टेडियम इंग्लैंड के प्रशंसकों की आवाज़ से गूंज रहा था. हमने शुरुआती बढ़त बनाने के कुछ समय बाद ही एक और गोल कर लिया था. हाफ़ टाइम के बाद इंग्लैंड के कुछ प्रशंसक भारतीय टीम का समर्थन करने लगे थे. वे कह रहे थे कि इनके ख़िलाफ़ आधा दर्जन गोल करो, जो हमारे लिए गर्व की बात थी.
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भारतीय हॉकी टीम दुनिया की एकमात्र ऐसी टीम है, जिसने 8 बार ओलंपिक में गोल्ड जीता है. इतना ही नहीं भारतीय हॉकी टीम लगातार 6 बार, ओलंपिक चैंपियन भी बन चुकी है.

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