कॉफ़ी पीने के लिए आप अकसर कॉफ़ी कैफ़े जाते होंगे और वहां अपने दोस्तों के साथ सुकून भरे कुछ पल बिताते होंगे. लेकिन आपको कैसा लगेगा, अगर किसी कैफ़े में आपको कॉफ़ी के साथ-साथ हॉकी स्टिक. क्रिकेट का बैट या डंडा पकड़ा कर कैफ़े में तोड़-फोड़ करने को कहा जाए तो? कुछ ऐसा ही होता है इन्दौर के एक कैफ़े में, जहां लोगों को सामान तोड़ कर, बर्तन फेंक कर और चीख-चिल्ला कर अपने मन की भड़ास निकालने की सुविधा दी जाती है. इस कैफ़े का नाम भड़ास कैफ़े है. कैफ़े का ऐसा नाम आप शायद पहली बार सुन रहे होंगे. यह अनोखा कैफ़े मध्य प्रदेश के इन्दौर शहर के चन्द्रनगर क्षेत्र में खुला है. लोग इस कैफ़े में जी-भर कर तोड़-फोड़ करते हैं और गुस्सा शान्त हो जाने पर खुद को तनावमुक्त महसूस करते हैं.

गुस्से में आप क्या तोड़ना पसन्द करेंगे?

कांच के गिलास, कप, कुर्सी, टीवी, लैपटॉप, कम्प्यूटर, सीपीयू, घड़ी से ले कर यहां आपको हर वो चीज़ मिलेगी, जिसे आप तोड़ना चाहते हैं. गुस्सा निकालने के लिए यहां पंचिंग बैग्स से ले कर गुब्बारे तक मौजूद हैं. 2 रुपये से 5 रुपये तक देकर आप कांच के गिलास तोड़ सकते हैं, जबकि 50 रुपये में आप घड़ी पर हाथ साफ़ कर सकते हैं. बड़े सामान तोड़ने के लिए आपको और ज़्यादा पैसे देने होंगे, हालांकि नुक़सान के मुक़ाबले यह क़ीमत कम है. इस कैफ़े की सबसे ख़ास बात यह है कि यहां आपको कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है, जितना मर्ज़ी हो, उतनी तोड़-फोड़ करिए और अपने मन की भड़ास निकालिए.

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लोगों को तनावमुक्त करने के लिए खुला है यह कैफ़े

कैफ़े के मालिक अतुल मलिकराम का कहना है, 'ये भारत में इस तरह का पहला कैफ़े है. आज की भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में लोगों को तनाव और अवसाद से आज़ाद करने में ये कैफ़े बहुत मदद करेगा. ख़ासतौर से युवाओं के लिए ये बहुत मददगार साबित होगा, क्योंकि इस कैफ़े में तोड़-फोड़ करके वो अपना मन शान्त कर पाएंगे और अपने बेहतर भविष्य पर फ़ोकस कर पाएंगे.'

लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें तोड़-फोड़ से पहले ग्लव्स, हेल्मेट और ट्रैक सूट भी पहनाए जाते हैं. इस कैफ़े की दीवारों और छत पर हर तरफ नफ़रत, गुस्सा, गुबार, चीखना जैसे शब्द बड़े-बड़े अक्षरों में लिखे हुए हैं.

कैफ़े के मालिक का मानना है कि लोग यहां नकारात्मक भावनाएं दिल में ले कर आते हैं और कैफ़े में मनमानी तोड़-फोड़ करके वो यहां से सकारात्मक होकर जाते हैं.

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अमेरिका से आया है भड़ास कैफ़े का आइडिया

भारत के लोगों को भले ही ऐसा कैफ़े नया और अजीबोग़रीब लगे, लेकिन विदेशों में बहुत पहले से ही ऐसे भड़ास केन्द्र लोकप्रिय हैं, जहां जा कर लोगों को अपना गुस्सा निकालने का मौका मिलता है. वहां इन्हें Anger Room के नाम से जाना जाता है. लोगों में बढ़ते Depression को देखते हुए सबसे पहले Anger Room बनाने का ख़्याल अमेरिका की एक Teenager डोना अलेक्ज़ेन्डर के मन में आया था. साल 2008 में उसने अपने ऑफ़िस के लोगों को 5 डॉलर के बदले तोड़-फोड़ करने के लिए अपने गैराज में आमंत्रित किया. लोगों को यह आइडिया पसन्द आया. बाद में अजनबी भी उससे तोड़-फोड़ करने देने का आग्रह करने लगे. 2 साल बाद डोना ने अपनी जॉब छोड़ कर इस काम का बिज़नेस शुरू कर दिया. आज अमेरिका समेत कई देशों में बहुत से Anger Room खुले हुए हैं.

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इस कैफ़े में मन शान्त करने के दूसरे तरीके भी हैं

सिर्फ़ तोड़-फोड़ ही नहीं, इस भड़ास कैफ़े में आप कॉफ़ी की चुस्कियां लेते हुए अपना मनपसन्द संगीत सुन सकते हैं. मैडिटेशन रूम में जा कर ध्यान कर सकते हैं. इस दौरान आपके मोबाइल और दूसरे गैजेट्स आपसे दूर रख दिए जाएंगे. ज़रूरत महसूस होने पर यह कैफ़े आपको Psychologist का परामर्श भी दिलवाएगा.

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आप चाहे अपने बॉस से परेशान हों या बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड का गुस्सा हो, पढ़ाई का Frustration हो या पति-पत्नी की आपस में न बनती हो, किसी पर बहुत गुस्सा आ रहा हो या किसी का सर फोड़ देने का मन कर रहा हो, तो अब मन मारने की ज़रूरत नहीं. आपके मन की भड़ास निकालने के लिए भड़ास कैफ़े है न!

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