नवी मुंबई में इन दिनों तलोजा औद्योगिक क्षेत्र के पास रहने वाले कुत्तों को एक अलग प्रकार की बीमारी ने जकड़ लिया है. जी हां, यहां के सफ़ेद कुत्तों का पूरा शरीर नीला होता जा रहा है. कई कुत्ते ऐसे हैं जिनके बाल, फ़र का रंग सफ़ेद की जगह नीला हो गया है.

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ऐसा क्यों हो रहा है या इसके पीछे क्या कारण है इसका जवाब शायद इस इलाके में स्थित कसाड़ी नदी में छिपा है. क्योंकि ये नवी मुंबई का औधोगिक क्षेत्र है और यहां मौजूद फैक्ट्रीज़ से निकलने वाले केमिकल युक्त अपशिष्ट पदार्थों को इस नदी में ही बहाया जाता है. जब कुत्ते यहां का पानी और यहां पड़े खाने की चीज़ों को खाते हैं, तो कैमिकल की वजह से उनकी बॉडी नीली हो जाती है.

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नवी मुंबई नगर निगम में हुए पानी की गुणवत्ता का परीक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि इसमें पर्याप्त मात्रा में अपशिष्ट पदार्थ मौजूद थे. जबकि Biochemical Oxygen Demand (BOD) के स्तर के अनुसार, जलीय जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा- 80 मिलीग्राम प्रति लीटर (मिलीग्राम / एल) थी. वहीं क्लोराइड का स्तर, जो जहरीले वनस्पतियां, जलीय जीवन और वन्य जीवन को नुकसान पहुंचाता है,वो अधिक मात्रा में था.

गौरतलब है कि Central Pollution Control Board के निर्देशों के अनुसार, अगर पानी में BOD का स्तर 6 मिलीग्राम/एल से ऊपर होता है, तो मछली मर जाती है. वहीं 3 मिलीग्राम /एल से ऊपर के स्तर वाला पानी इंसानों के लिए हानिकारक हो जाता है. औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थों के कारण कसाड़ी नदी का प्रदूषण स्तर 13 गुना तक बढ़ गया था.

वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस प्रदूषित जल से इंसानों की सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है. पिछले साल अगस्त में यहां के मछुआरे भी इसी कारण से परेशान थे कि इस प्रदूषित नदी के पानी में मछलियों की जान भी खतरे में ही है.

Hindustan की रिपोर्ट के अनुसार, नवी मुंबई पशु संरक्षण सेल ने बीते बुधवार को एक कुत्ते की कुछ फ़ोटोज़ खींची थी, जिसके बालों का रंग नीला हो गया था. उसके बाद पशु संरक्षण सेल ने इसकी शिकायत महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) में दर्ज कराई. सेल ने अपनी शिकायत में इस इलाके में घूमने वाले पशुओं के बीमार होने के बारे में जानकारी दी. ताकि वो इन इंडस्टियल यूनिट्स के खिलाफ कोई कार्यवाई करे. क्योंकि कुत्तों की इस स्थिति का प्रमुख कारण ये फैक्टरीज़ और औद्योगिक इकाइयां ही हैं, जो नदियों में सीधे अपशिष्ट पदार्थ का प्रवाह कराती हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस क्षेत्र में लगभग 1000 दवा, खाद्य और इंजीनियरिंग कारखाने हैं.

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वहीं इस पर प्रतिक्रिया दिखाते हुए, नवी मुंबई में Animal Protection Cell चलाने वाली आरती चौहान ने कहा,

ये चौंकाने वाला था कि कैसे कुत्ते का सफेद फर पूरी तरह से नीला हो गया था. हमने 5 ऐसे कुत्तों को देखा है, जिनका रंग नीला पड़ गया था. साथ ही ऐसे उद्योगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए Pollution Control Board से अपील की है.

Local Fishing Community के मेंबर योगेश पगड़े ने बताया कि इस तरह की कई शिकायतों के चलते पिछले कुछ सालों में MPCB के कारण, कसाड़ी में बदबू थोड़ी कम हो गई है. हालांकि, प्रदूषण का स्तर बहुत हाई हो गया है. और इसमें ऑक्सीजन की मात्रा भी ख़त्म हो गई है.

MPCB के अधिकारियों के अनुसार, 'हमने इन सभी शिकायतों पर कार्यवाही शुरू कर दी है. और ये भी सूचित कर दिया है कि किसी भी जल निकाय में औद्योगिक अपशिष्ट पदर्थों के प्रवाह की अनुमति देना अवैध है. हम इन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे, क्योंकि वो पर्यावरण को नष्ट कर रहे हैं. इसके साथ ही MPCB के रीजनल ऑफ़िसर, अनिल मोहेकर ने कहा, 'हमने जांच के लिए हमारे उप-क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देश दिया है.'

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आरती चौहान का कहना है कि हालांकि इस आंदोलन की शुरुआत करने में हमने काफी देरी कर दी है. अभी तो हमने केवल नीले कुत्ते ही देखे हैं. क्या पता चिड़िया, रेप्टाइल्स और बाकी जीव-जंतु भी इसका शिकार हो रहे होंगे. पता नहीं कितने इस वजह से मर भी चुके होंगे.

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