पीक ऑवर्स में दिल्ली मेट्रो में इतनी भीड़ होती है कि पांव तक रखने की जगह नहीं होती. ऐसे में कोई हॉकर(सामान बेचने वाला) आ जाए तो क्या होगा? हालांकि, ऐसा होना लगभग नामुमकिन है क्योंकि मेट्रो में सामान बेचना दंडनीय अपराध है. लेकिन पिछले 1 साल से एक 10 साल का बच्चा अपना पेट पालने के लिए ऐसा करता आ रहा है.

इस लड़के का नाम है संदीप. वो दिल्ली मेट्रो में बच्चों के खिलौने बेचता है ताकी अपने लिए दो वक़्त की रोटी का इंतज़ाम कर सके. संदीप मेट्रो की पिंक और ब्लू लाइन पर आपको फ़िजेट स्पिनर और ऐसे ही दूसरे खिलौने बेचता है.

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दिल्ली में अकेले रहता है संदीप

उसके पिता एक मज़दूर हैं. उसकी मां और छोटा भाई गांव में रहते हैं. वो दिल्ली के रघुबीर नगर इलाके में एक छोटे से कमरे में अकेले रहता है. उसका कहना है कि जब भी उसे पैसों की ज़रूरत होती है, तो मेट्रो में सामान बेचने निकल पड़ता है.

संदीप ने बताया कि मेट्रो में जब उसके पास पैसे होते हैं तो वो टोकन ख़रीदाता है, लेकिन जब उसके पास पैसे नहीं होते तब वो बिना टोकन के ही सफ़र करता है. वो सदर बाज़ार से सस्ते खिलौने लाकर उन्हें 20-30 रुपये में यहां बेचता है.

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उसका कहना है कि मार्केट में उससे कोई खिलौने नहीं ख़रीदता जबकि, वहां उसकी अच्छी कमाई हो जाती है. वो एक दिन में 200 रुपये या कभी-कभी इससे अधिक रुपये कमा लेता है. कुछ लोग उसे सहानुभूती दिखाते हुए भी पैसे दे देते हैं.

भीख मांगकर नहीं कमाकर अपना पेट भरना चाहता है

संदीप का कहना है कि उसे पता है कि मेट्रो में इस तरह से सामान बेचना दंडनीय अपराध है. मगर वो कहता है कि दूसरों की तरह भीख मांगना उसे पसंद नहीं है. वो अपने हालात के आगे मजबूर है.

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हो सकता है कि संदीप से ये काम जबरन करा रहा हो. अभी तक इसका खुलासा नहीं हुआ है. वहीं दिल्ली मेट्रो का कहना है कि अभी तक उनके सामने ऐसा कोई केस नहीं आया है. इसके साथ ही दिल्ली मेट्रो के प्रवक्ता ने इस मामले पर स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा- 'Delhi Metro Operations और Maintenance Act के तहत ऐसे कृत्य दंडनीय हैं. इस तरह की घटनाएं सामने आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.'

क्या संदीप को इस तरह मेट्रो में खिलौने बेचना चाहिए कि नहीं. इस पर आपकी क्या राय है?

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