किसी भी इंसान के लिए रेप जैसे घिनौने विषय पर बात करना मुश्किल होता है. उस पति के लिए तो और भी मुश्किल होता है जिसकी पत्नि के साथ गैंगरेप हुआ हो.

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जिस विषय पर हर कोई चुप रहना बेहतर समझता है, जितेंदर ने उस पर खुल कर बात करना ही बेहतर समझा. जितेंदर ने बताया कि कुछ साल पहले 8 लोगों ने उनकी पत्नी का सामूहिक बलात्कार किया था. इस दौरान आरोपियों ने घटना का वीडियो बना लिया और तस्वीरें भी खींच ली. इसके बाद आरोपी करीब डेढ़ साल तक उनकी पत्नी को ब्लैकमेल और उसका रेप करते रहे.

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'मैं हरियाणा के छत्तर गांव से हूं. पास के गांव जींद की एक लड़की से मेरे रिश्ते की बात चल रही थी. मैं घरवालों की पसंद से शादी करने को राज़ी था, लेकिन एक बार लड़की से मिलना चाहता था. इसलिए एक दिन मैं अपने माता-पिता के साथ उसके घर गया. दोनों परिवारों की मंजू़री के बाद 4 महीने बाद की हमारी शादी की तारीख़ तय हुई. हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में ये परंपरा है कि शादी के चार महीने पहले से आप दुल्हन को देख नहीं सकते. इसलिए हम दोनों फ़ोन पर बातें करने लगे'.
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एक दिन फ़ोन पर बात करते हुए उसने कहा कि वो मुझसे कुछ ज़रूरी बात करना चाहती है. इसलिए अपने माता-पिता के साथ एक बार उनके घर आयें. कुछ दिन बाद जब हम उनके घर पहुंचे तो उन्होंने कहा कि वो झूठ के साथ ये शादी नहीं करना चाहती, इसलिए कुछ ज़रूरी बात बताना चाहती हैं. इसके बाद उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उनके साथ सामूहिक गैंगरेप हुआ था. ये बात बताते हुए उनकी आंखों में आंसू थे और उन्होंने मेरी ओर देखते हुए कहा कि मैं इस रिश्ते के लायक नहीं हूं, इसलिए आप मुझसे शादी न करें तो बेहतर होगा.

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'ये बात सुनकर मैं थोड़ी देर के लिए हैरान रह गया. मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि उन्हें क्या जवाब दूं. फिर मैंने अपने अंतरआत्मा की आवाज़ सुनी और ठान लिया कि शादी करूंगा तो इसी लड़की से. अगर मैंने इस शादी नहीं की, तो भगवान मुझे माफ़ नहीं करेगा. इसके बाद मैंने दोनों परिवारों के सामने कहा कि मैं इस शादी के लिए तैयार हूं और ये वादा भी करता हूं कि लड़की को न्याय दिलाकर ही रहूंगा. बस इसी दिन से हमारी ये लड़ाई शुरू हो गई थी, जो आज तक चल रही है'.
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उनके घर से वापस आने के दो हफ्ते बाद ही मैंने उन आठ बलात्कारियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की. कानूनी कार्यवाही के लिए कुछ वकीलों को इसकी ज़िम्मेदारी दी. इस बीच मिली कई धमकियों के बावजूद दिसंबर 2015 में हमने शादी कर ली.

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उन आठ लोगों में से एक शख़्स ऐसा भी था, जो किसी किसी ताक़तवर राजनीतिक परिवार से था. शिकायत वापस लेने के लिए वो अक्सर दोनों परिवारों को धमकी देते रहता था. इस दौरान पुलिस ने भी हमारा साथ देने के बजाय मेरे ख़िलाफ़ ही धोखाधड़ी के तीन झूठे मामलों में एफ़आईआर दर्ज कर दी. इन सब मुसीबतों के बावजूद मेरे माता-पिता मेरे और मेरी पत्नी के साथ खड़े थे.

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कुछ समय बाद ज़िला अदालत ने बलात्कारियों को बरी कर दिया. इसके बाद मैं न्याय के लिए उच्च न्यायालय गया. मुकदमा लड़ने के लिए मुझे अपनी कुछ ज़मीन भी बेचनी पड़ी. वकीलों की फ़ीस पर लगभग 14 लाख रुपये ख़र्च करने के बावजूद कुछ हासिल नहीं हुआ. इस दौरान दोनों परिवारों को बेहद परेशानियां झेलनी पड़ी. हमें परिवार के खेती व्यवसाय को छोड़ कर जींद में रहना पड़ा, ताकि मेरी पत्नी अपने माता-पिता के करीब हो सके.

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मैं अब कानून की डिग्री भी ले रहा हूं, ताकि अपनी पत्नी का मुकदमा ख़ुद लड़ सकूं. क्योंकि मेरे पास वकीलों की फ़ीस देने के लिए न तो पैसे हैं, न हीं मुझे अब दूसरे वकीलों पर भरोसा है. मेरे कहने पर अब मेरी पत्नी भी कानून की पढ़ाई कर रही है, ताकि हम दोनों मिलकर आरोपियों को सज़ा दिला सकें. इसके लिए मैं अपने पूरे परिवार के साथ जल्द ही चंडीगढ़ शिफ़्ट होने जा रहा हूं. ताकि एक साथ कानून का अभ्यास करे सकें और वापस आकर अपने गांव की महिलाओं की मदद कर सकें.

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फ़िल्म निर्माता विभा बख्शी जल्द ही जितेंदर छत्तर की ज़िंदगी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म 'सन राइज़' बनाने जा रही हैं.

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