दर्शकों को अपनी मज़ेदार कॉमेडी से लोटपोट कर देने वाले जॉनी लीवर की ज़िन्दगी किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है. सड़कों पर पेन बेचने वाला ये जॉनी बॉलीवुड का कॉमेडी किंग बनेगा ये किसने सोचा था. पेन बेचने से लेकर मायानगरी मुंबई तक का सफ़र और कॉमेडी किंग बनने की इनकी कहानी बेहद संघर्षशील और प्रेरणादायक है.

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जिनको हम जॉनी लीवर के नाम से जानते हैं उनका असली नाम जॉन राव जानूमाला है. हिन्‍दुस्‍तान लीवर कंपनी में काम करने के कारण उन्‍हें जॉनी लीवर कहा जाने लगा था. जॉनी लीवर को बचपन से ही फ़िल्म स्टारों की मिमिक्री करना अच्छा लगता था, लेकिन सही मौका मिल नहीं पा रहा था. मुंबई जैसे शहर में रहने और खाने के लिए कुछ तो करना था इसलिए जॉनी हिन्‍दुस्‍तान लीवर में काम करने लगे. इस दौरान वो काम के साथ-साथ छोटे-मोटे स्टेज शो के ज़रिये लोगों को हंसाने का काम भी करने लगे.

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ऐसे ही एक स्टेज शो के दौरान बॉलीवुड स्टार सुनील दत्त की नज़र उनपर पड़ी, उन्होंने जॉनी को फ़िल्म दर्द का रिश्ता’ में काम करने का मौका दिया. इसके बाद उन्हें कुछ और फ़िल्मों में भी काम करने का मौका मिला, लेकिन उनकी कॉमेडी ज़्यादा चल नहीं पायी. जॉनी आज 350 से ज़्यादा फ़िल्में कर चुके हैं.

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साल 1993 में जॉनी को शाहरुख़-काजोल स्टारर फ़िल्म ‘बाजीगर’ में काम करने का मौका मिला. इस फ़िल्म में उन्होंने अपनी ज़बरदस्त कॉमेडी से सबका दिल जीत लिया था. इसके बाद तो जॉनी हर बॉलीवुड फ़िल्म में दिखने लगे, उनके बिना किसी भी फ़िल्म की कल्पना ही नहीं की जाती थी. जॉनी ने बॉलीवुड में उस समय कदम रखा जब फ़िल्मों से कॉमेडी ख़त्म सी हो चली थी.

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90 के दौर में फ़िल्में अपने म्यूज़िक के लिए ज़्यादा जानी जाती थी, ऐसे दौर में जॉनी ने फ़िल्मों में अपनी मज़ेदार कॉमेडी का तड़का लगाया. हीरो का दोस्त हो या फिर हीरोइन के बाप का जासूस उन्होंने अपनी दमदार कॉमेडी से दर्शकों का ख़ूब मनोरंजन किया. उस दौर में स्क्रीन पर जॉनी के आते ही सिनेमा हॉल में सीटियां बज जाया करती थी.

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90 के दौर में जब कादर ख़ान और शक्ति कपूर जैसे दिग्गज़ अपनी कॉमेडी से दर्शकों के फ़ेवरेट हुआ करते थे. ऐसे दौर में भी जॉनी लीवर ने अपनी बेजोड़ कॉमेडी से इन दोनों दिग्गज़ों को कड़ी टक्कर दी.

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1993 में आयी 'बाज़ीगर' से लेकर 'गोलमाल-3' तक जॉनी ने बॉलीवुड के कॉमेडी स्टैंडर्ड उस लेवल तक पहुंचाया जहां शायद ही कोई और कॉमेडियन लेकर गया हो. फ़िल्म चाहे अच्छी हो या बुरी उस फ़िल्म में जॉनी लीवर का होना, मतलब दर्शकों के लिए कॉमेडी की डबल डोज़. अच्छी कॉमेडी के लिए कॉमेडियन का एक ख़ास अंदाज़ होना बेहद ज़रूरी होता है. इस मामले में जॉनी लीवर बेहद लकी थे उनके अंदर एक अलग सा पागलपन है. दर्शक उनके इसी ऑनस्क्रीन पागलपन के दीवाने हैं.

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बाज़ीगर, करन-अर्जुन, यस बॉस, मैं खिलाडी तू अनाड़ी, जब प्यार किसी से होता है, दीवाना मस्ताना, दूल्हे राजा, राजा हिन्दुस्तानी, सोल्जर, बादशाह, कुछ कुछ होता है, अजनबी, नायक, लव के लिए कुछ करेगा, फिर हेरा फेरी और गोलमाल-3 जैसी कई फ़िल्मों में अपनी ज़बरदस्त कॉमेडी से लोगों को हंसाने वाले जॉनी आज भी बॉलीवुड के नंबर वन कॉमेडियन हैं.