सरकारें आई और चली गईं, मगर नहीं छूटा तो उनका आधार से प्यार. सुप्रीम कोर्ट ने एक ही झटके में सबका नशा उतार दिया. ये सब हुआ है एक 92 साल के रिटायर्ड जज की बदौलत. इन्होंने ही 6 साल पहले आम आदमी के अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज की थी.

जब चारों ओर आधार के ख़िलाफ़ आम आदमी की लड़ाई की जीत का जश्न मनाया जा रहा है, ऐसे में उस शख़्स के बारे में भी हमें जान लेना चाहिए, जिसने हमें ये जीत दिलाई है.

इनका नाम है K.S Puttaswamy. इन्होंने ही 2012 में पहली बार सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की थी, जो हर सरकारी योजना के साथ आधार कार्ड को लिंक करने पर आमादा थी. आपकी जानकारी के लिए बता दें, उच्चतम न्यायालय में इस प्रकार की 27 अर्ज़ियां दी गई थीं, जिनमें सबसे पहली इन्हीं की थी.

Puttaswamy ने ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एक तरह से लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर सेंध लगाने में जुटी सरकार को कठघरे में खड़ा किया था. इन्होंने अपनी याचिका में ये दलील दी थी कि जिसे संसद की कार्यकारिणी सीमिती ठुकारा चुकी थी, उस नियम को सरकार ने क्यों लागू किया?

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उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार ने इसके लिए कोई संसदीय समर्थन भी नहीं लिया है. यही नहीं, इसके निजता के अधिकार के उल्लघंन की भी पूरी संभावना है. Puttaswamy ने अपील उस वक़्त दायर की, जब उन्हें आयकर रिटर्न भरने के लिए आधार कार्ड को लिंक करने को कहा गया था.

उनकी याचिका के बाद ही कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार 2017 में आधार अधिनियम लेकर आई थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अभी भी आयकर दाताओं को अपना आधार लिंक करने के निर्देश दिया है, मगर फिर भी इसे Puttaswamy की जीत ही कहा जाएगा. Puttaswamy ने देश के करोड़ों लोगों के अधिकारों की लड़ाई तो जीत ली है. वो भी इस बात से ख़ुश हैं.

ख़ैर 92 साल में Puttaswamy ने सरकार को उसकी ग़लत नीतियों को बदलने पर मजबूर कर दिया. ये दर्शाता है कि उम्र के किसी भी पड़ाव में भी आप अपने और दूसरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ सकते हैं.

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