मशहूर Reggae आर्टिस्ट और रास्तासफ़ारी कल्चर को दुनिया भर में लोकप्रियता दिलाने वाले बॉब मार्ले जब मौत की कगार पर थे, तो उन्होंने अपने बेटे से आखिरी वाक्य यही कहे थे - पैसों से ज़िंदगी नहीं खरीदी जा सकती है. 60 के दशक के रॉक स्टार्स हों या दुनिया के असल दार्शनिक बाबा, सभी पैसों को मोह माया का द्वार ही बताते आए हैं लेकिन उपभोक्तावादी दौर में बिना इस माया के जीवन भी दूभर है.

हालांकि 28 साल के अंश मिश्रा इस मामले में अपवाद हैं. इलाहाबाद टेक्निकल कॉलेज से एमबीए करने वाले अंश ने बिना किसी पैसों के 24 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की यात्रा करने में सफ़ल रहे. 250 दिनों बाद उन्होंने जगदालपुर में अपनी यात्रा खत्म की.

मिश्रा ने कहा कि मैंने 3 फ़रवरी 2017 को बिना किसी पैसों के अपनी ये यात्रा शुरू की थी. नेशनल हाइवे पर आते जाते वाहनों से मैंने लिफ़्ट ली. लोगों के सहयोग के सहारे मेरे खाने, रहने और यात्रा करने का समाधान होता रहा. इस सफ़र के दौरान 1800 ट्रक ड्राइवर्स ने मुझे लिफ़्ट दी.कभी कभी ऐसा भी वक्त आया जब मुझे ट्रक के अंदर ही सोना पड़ता और इस दौरान ड्राइवर्स के हाथ का बना खाना खाकर गुज़ारा करता.

उन्होंने बताया कि हालांकि ऐसा वक्त भी आया जब मुझे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. मसलन एक बार गुजरात के सूरत में मुझे लिफ़्ट के लिए 9 घंटों तक का इंतज़ार करना पड़ा था, कोई साधन नहीं था तो खाने के लिए भी 26 घंटों का इंतज़ार करना पड़ा था. केरल में भी मुझे शक की निगाहों से देखा गया और वहां ज़्यादा लोगों ने मेरी मदद नहीं की.

अंश ने इस दौरान बस्तर की भी यात्रा की. उन्होंने कहा कि ये एक खूबसूरत जगह है और अगर यहां से माओवादियों की समस्या खत्म हो जाए तो ये एक बेहतरीन पर्यटन स्थल हो सकता है. यूं तो मेरे परिवार ने मुझे वहां जाने से मना किया था लेकिन मुझे वहां पहुंचकर किसी तरह की परेशानी नहीं हुई बल्कि मुझे तो लगता है कि इस जगह में एक शानदार टूरिस्ट स्पॉट बनने की पूरी संभावनाएं हैं.

Source: Timesnownews