एक ऐसे देश में जहां लाखों लोग मीलों दूर चलकर पानी की व्यवस्था करने के लिए मजबूर हों वहीं कई कार कंपनियां पर्यावरण और पानी को लेकर ज़रुरी संवेदनशीलता दिखा रही हैं. देश की प्रतिष्ठित कार कंपनियों में शुमार मारुति सुज़ुकी ने अपनी वर्कशॉप्स में साफ़ होने वाली कारों पर बर्बाद होने वाले पानी को बचाने के लिए एक नायाब तरीका निकाला है.

मारुति की इस पहल का नाम है - ड्राई वॉश सिस्टम. ये सिस्टम केवल पर्यावरण फ़्रेंडली और बायोडिग्रेडेबल केमिकल्स का ही इस्तेमाल करता है. इसमें वाहनों पर डस्टिंग करने के बाद एक एयर प्रेशर टैंक की मदद से स्पेशल केमिकल स्प्रे किया जाता है. इसके बाद निकलने वाला फ़ोम गाड़ी की पूरी बॉडी पर फ़ैल जाता है और एक माइक्रो फ़ाइबर कपड़े की सहायता से इसे साफ़ कर लिया जाता है.

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पिछले साल इस सिस्टम का इस्तेमाल कर 2.28 मिलियन कारों यानि 28 लाख कारों को इस तकनीक से साफ़ किया गया था. कंपनी का कहना है कि इस तरीके के इस्तेमाल से न केवल कारों को धोने का समय कम हुआ है बल्कि इसकी वजह से हर साल 216 मिलियन लीटर पानी को भी ये लोग बचाने में कामयाब रहे हैं.

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जहां इस सिस्टम के द्वारा कार की बाहरी बॉडी को आसानी से साफ़ किया जा सकता है, वहीं कार के भीतरी हिस्से को अब भी पानी से साफ़ सफ़ाई की दरकार होती है. हालांकि मारुति सुज़ुकी ने अपनी 880 वर्कशॉप्स में ऑटोमैटिक कार वॉश सिस्टम को भी इंस्टाल किया है जिसकी वजह से गाड़ी के अंदरुनी हिस्से को साफ़ करने पर पारंपरिक तरीके की तुलना में 20 प्रतिशत पानी का बचाव होता है.

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मारुति ने इसके अलावा भी पर्यावरण की बेहतरी के लिए कई पहल की हैं. कागज की Wastage को बचाने के लिए कार के मैन्युएल को CD-ROM में और जॉब कार्ड्स को जनरेट करने के लिए टैब्लेट्स का इस्तेमाल किया जाता है. गौरतलब है कि वॉटरलेस वॉश सिस्टम देश की 1130 वर्कशॉप्स में उपलब्ध है.

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