यौन उत्पीड़न दुनिया की कई महिलाओं की ज़िन्दगी की कड़वी सच्चाई है. मेक्सिको जैसे प्रगतिशील देश में भी 10 में से 9 महिलाओं को किसी न किसी समय पर यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है. हम 2017 में प्रवेश कर चुके हैं, लेकिन ये दुर्भाग्य ही है कि आज भी दुनिया के ज़्यादातर हिस्सों में महिलाएं बराबरी की लड़ाई के लिए संघर्षरत हैं.

सोशल मीडिया के इस क्रांतिकारी युग में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर दुनिया का एक तबका आवाज़ उठाने लगा है, लेकिन कई लोग आज भी यौन उत्पीड़न के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेते. शायद यही वजह है कि मेक्सिको की मेट्रो ट्रेन ने एक अजीब लेकिन सधे हुए कैंपेन के साथ लोगों को महिलाओं के साथ होने वाले Sexual Harassment के प्रति जागरूक करने की कोशिश की है.

मेक्सिको की मेट्रो ने एक खास प्रकार की सीट का निर्माण किया है. इस सीट को Penis Seat का नाम दिया गया है. दरअसल इस सीट पर इंसान के नग्न शरीर को प्लास्टिक से बनाया गया है. मेट्रो में बनी एक वीडियो से सामने आया कि इस सीट पर बैठते ही लोगों को अपनी टांगों के नीचे अजीबोगरीब असहजता का अहसास हुआ.

दरअसल मेक्सिको मेट्रो में बनी इस वीडियो का मकसद ये दर्शाना था कि कैसे इस सीट पर बैठते ही पुरुषों को कोफ़्त और परेशानी का सामना करना पड़ा. यह सीट खासतौर पर पुरुषों के लिए ही थी. कई लोग तो इस सीट को देखते ही नाक-भौं तक सिकोड़ने लगे थे और कई तो थके होने के बावजूद इस सीट पर बैठने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे, क्योंकि ज़ाहिर है, कोई भी इंसान इस पर बैठकर असहज महसूस नहीं करना चाहता था.

Source: Newsheads

लेकिन जो संदेश इस सीट के बराबर में लिखा था, उसे पढ़कर लोग इस सीट की प्रासंगकिता का अंदाज़ा लगाना मुश्किल न था. इस सीट पर लिखा था:

"इस सीट पर बैठना बेहद असहज है, लेकिन सच कहा जाए, तो रोज़ाना महिलाओं पर होने वाले यौन उत्पीड़न के सामने ये असहजता कुछ भी नहीं है."

दरअसल ये सीट यौन उत्पीड़न के खिलाफ़ जारी कैंपेन का हिस्सा थी. भीड़-भाड़ भरे क्षेत्रों में या पब्लिक जगहों पर अक्सर महिलाओं को ग़लत टच का शिकार होना पड़ता है. ज़्यादातर महिलाएं इन मामलों को नज़रअंदाज़ करना ही बेहतर समझती है, लेकिन उनके लिए ये अनुभव किसी बुरे स्वप्न से कम नहीं होते. मेक्सिको मेट्रो का ये अजीबोगरीब कैंपेन उन सोते हुए लोगों को जगाने का एक प्रयास था, जिन्हें लगता है कि महिलाएं Privileged होती हैं और रोजमर्रा की ज़िंदगी में उन्हें किसी तरह की तकलीफ़ का सामना नहीं करना पड़ता.

Source: Metro