2016 को किनारे करते हुए 2017 दरवाज़े से दाखिल हो चुका है. साल 2016 जहां अपने साथ नोटबंदी जैसे मुद्दों को अपने साथ ले गया, वहीं जाते-जाते भी कई लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर गया. दरअसल नए साल के स्वागत के साथ ही दिल्ली के कई क्लबों और रेस्तरां द्वारा एक ऑफर रखा गया था, जिसके मुताबिक नए साल पर प्रधानमंत्री के भाषण में जितनी बार भी 'मित्रों' शब्द का इस्तेमाल होगा, लोगों को 200% के ऑफर के साथ 31 रुपये में बियर सर्व की जाएगी.

इस ऑफर के आने के बाद से ही क्लबों और रेस्तरां के बाहर लोगों की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी. पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए अपने भाषण में 'मित्रों' के बजाय 'मित्रां' शब्द का इस्तेमाल किया. ये पहला ऐसा मौका था, जब लोग टेलीविज़न सेट्स से सिर्फ इसलिए जुड़े थे कि वो मोदी जी के भाषण में 'मित्रों' शब्द को गिन सकें.

इस बात पर चुटकी लेते हुए कर्ण कहते हैं कि 'मोदी जी बहुत चालाक हैं, उन्हें क्लब्स की इस स्कीम का पहले से ही पता चल गया, इसलिए उन्होंने अपने डायलॉग ही बदल दिए.'

एक वेबसाइट की सोशल मैनेजर दीक्षा सुखीजा का कहना है कि 'आजकल किसी भी विषय पर लोग सोशल मीडिया पर ट्रॉल करना शुरू कर देते हैं, पर ऐसा पहली बार हुआ है कि लोगों ने इस पर कोई मज़ाक नहीं किया.'

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