मोहम्मद अली. 60 के दशक का क्रांतिकारी मुक्केबाज. इंटरनेट के युग में अली को ग्रेटेस्ट ऑफ़ ऑल टाइम (GOAT) कहा जाने लगा है. यानि दुनिया का महानतम एथलीट. बॉक्सिंग रिंग में कई यादगार फ़ाइट्स में शामिल रहे कैशियस क्ले रिंग के बाहर, शांति और सौहार्द की मिसाल पेश करते रहे. फ़िर चाहे वो वियतनाम युद्ध को लेकर उनका विरोध हो या फिर नस्लभेद के खिलाफ़ उनकी लड़ाई. इस बीच उन्हें कई परेशानियों के दौर से भी गुज़रना पड़ा.

आज यानि 28 अप्रैल, मुहम्मद अली के लिए एक ऐसा ही परेशानी भरा दिन था जब अमेरिका की बॉक्सिंग अथॉरिटी ने मुहम्मद अली का विश्व हैवीवेट खिताब छीन लिया था और उनके बॉक्सिंग लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया गया था.

28 अप्रैल, 1967

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अमेरिका के टैक्सास शहर में आज से पूरे 50 साल पहले अली, 11 लोगों के साथ मौजूद थे. एक अफ़सर उन्हें अमेरिका-वियतनाम युद्ध में भागीदारी को लेकर शपथ दिलाना चाहते थे, लेकिन अली ने शपथ लेने से इंकार कर दिया.

एक और अधिकारी अली के पास पहुंचा और उसने उन्हें बाहर आने का आग्रह किया. अली ने कुछ नहीं कहा और उसके साथ बाहर चला गया. अली के बाहर जाते ही शपथ स्वीकार न करने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई.

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अली दोबारा कमरे में आए और उन्होंने एक बार फिर शपथ लेने से इंकार कर दिया. इसके बाद न्यूयॉर्क बॉक्सिंग कमीशन, विश्व बॉक्सिंग एसोसिएशन, टैक्सास बॉक्सिंग एसोसिएशन ने उनके विश्व हैवीवेट खिताब को वापस ले लिया. 1964 में महज 22 वर्ष की उम्र में अली ने वर्ल्ड हैवीवेट चैम्पियनशिप जीती थी.

हैवीवेट खिताब जीतने के बाद अली अमेरिकी सेना में जाने से मना कर चुके थे. वे वियतनाम के खिलाफ़ चल रहे युद्ध में अमेरिकी भागीदारी का विरोध करते रहे. यही कारण था कि उन्होंने अमेरिकी सेना में जाने से मना कर दिया था. अली को इसके बाद गिरफ़्तार कर लिया गया.

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अली ने अपने बयान में कहा था, "मैंने अपना हैवीवेट खिताब अपने दम पर जीता था. न तो मुझे ये किसी खैरात में मिला था और न ही मेरे धर्म या रेस के कारण मुझे दिया गया था. जो इस खिताब को लेना चाहते हैं और एक ऑक्शन टाइप बॉक्सिंग बाउट्स कराना चाहते हैं, उन्हें ये जान लेना चाहिए कि वे ऐसा करने के साथ ही अपने आपको शर्मिंदा कर रहे हैं. अमेरिका के बॉक्सिंग फ़ैंस और उदारवादी लोग ऐसे हेवीवेट चैंपियन को कभी स्वीकार नहीं करेंगे".

अली को पांच साल की कैद और 10,000 डॉलर जुर्माना लगा था. हालांकि अली ने सफ़लतापूर्वक अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जिसने 1971 में इनकी सज़ा को पलट दिया. वे चार वर्ष तक बॉक्सिंग से बाहर रहे थे. सत्ता के खिलाफ़ आवाज़ उठाने वाला ये टॉप क्लास एथलीट अपने संघर्षों के चलते दुनिया की महान आत्माओं में दर्ज हो गया.

Source: The Guardian