राम मंदिर एक ऐसा मुद्दा है, जिसकी आड़ में सालों से नेता अपनी राजनैतिक रोटियां सेंक रहे हैं. हिंदुस्तान के इतिहास में ये शायद एकलौता ऐसा मुद्दा है, जिसकी शुरुआत विवाद के साथ हुई थी और ये विवाद आज भी बदस्तूर ज़ारी है. विवादों की इसी श्रृखंला में नया नाम मोहम्मद आज़म खान का जुड़ा है, जिन्होंने कुछ दिनों पहले ही फैज़ाबाद और लखनऊ में 200 पोस्टर और बैनर लगा कर राम मंदिर बनाने का समर्थन किया था.

ख़बरों के मुताबिक, मोहम्मद आज़म श्री राम मंदिर मुस्लिम कार सेवक संघ के अध्यक्ष हैं. हाल ही में जब आज़म शहर की मस्जिद से नमाज़ पढ़ कर लौट रहे थे, तो कुछ शरारती तत्वों ने उन पर पर हमला कर चेहरे पर काली स्याही पोत दी. इस बाबत आज़म ने पुलिस में FIR भी करवाई.

उनका कहना है कि 'देश का विकास तब ही संभव है, जब राम मंदिर का निर्माण होगा. हिन्दू और मुसलमान के बीच आपसी सौहार्द्र को कायम करने के लिए इस विवाद का सुलझना ज़रूरी है.'

आज़म आगे कहते हैं कि 'उनके इस कदम के बाद उन्हें सोशल मीडिया से ले कर फ़ोन पर जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. कुछ लोग, तो उन्हें एंटी-मुस्लिम भी कह रहे हैं.' वो आगे कहते हैं कि लोग इस फ़ैसले से पीछे हटने के लिए उन पर दवाब बना रहे हैं, जबकि कुछ, तो मस्जिद निर्माण के लिए पैसे की पेशकश भी कर चुके हैं. आज़ाद का कहना है कि मेरा फ़ैसला देशहित में है, जिससे मैं कभी पीछे नहीं हट सकता.

आज़ाद का कहना है कि 'राम सिर्फ़ हिन्दुओं के देवता नहीं है, बल्कि हिंदुस्तान में रहने वाले हर शख्स का संबंध राम से है. उनका कहना है कि वो राम को अल्लाह के पैगम्बर के रूप में देखते हैं, जो हर हिन्दुस्तानी मुसलमान के लिए प्रिय हैं.'

आज़ाद सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले भी काफ़ी ख़ुश नज़र आ रहे हैं, जिसमें उसने कहा है कि राम मंदिर के विवाद को कोर्ट से बाहर सुलझाने की कोशिश करें. वो कहते हैं कि 'हम चाहते हैं कि राम मंदिर जल्द से जल्द बन जाये, अब जब कोर्ट भी इस बात की मंज़ूरी दे चूका है, तो हमें इंतज़ार किस चीज़ का है.'

इसके पीछे कहीं कोई राजनीति मंशा, तो नहीं?

इस बारे में जब मोहम्मद आज़म से बात कि गई, तो उनका कहना था कि:

'अल्लाह के फज़ल से मेरा कंस्ट्रकशन का काम है, जो बहुत बढ़िया चल रहा है. मेरी कंपनी का नाम भी पूर्व प्रधानमन्त्री अटल जी के नाम पर है. पैसे के लिए मुझे राजनीति में आने की कोई ज़रूरत ही नहीं.'

आज़म उन नेताओं की काफ़ी आलोचना करते हैं, जो मुसलमानों को चेहरा बना कर अपनी राजनीति की दुकान चला रहे हैं. उनका कहना है कि आखिर ये लोग कैसे सारे मुसलमानों का चेहरा बन सकते हैं?

कांग्रेस और सपा पर निशाना साधते हुए वो कहते हैं कि 'कुछ पार्टियां इस मामले का कभी कोई हल नहीं निकलने देना चाहती, क्योंकि इसी से उनकी राजनीति होती है.' बाबरी एक्शन समिति के लॉयर ज़फरयाब जिलानी के बारे में वो कहते हैं कि 'शुरुआत में इन जनाब ने कुछ नहीं किया और आज अरबों के मालिक बन गए.'

वो कहते हैं 'भगवान राम की कृपा से 2014 में एक सरकार सत्ता में आई, जिसके आने से राम मंदिर बनने की उम्मीद दिख रही है और जब इसी सरकार ने उत्तर प्रदेश में भी जीत दर्ज की, तो ये सपना सच होता हुआ दिखाई दे रहा है.'

आज़म का कहना है कि राम मंदिर के लिए वो संघर्ष करते रहेंगे.

Source: scoopwhoop