देश में सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल पेश करते हुए, मुस्लिम दंपति ने एक शहीद जवान की बच्ची की देखभाल का बीड़ा उठाया है. इस दंपति ने शहीद की पत्नी से संपर्क साध कर, सातवीं क्लास में पढ़ने वाली खुशदीप की देखभाल की पेशकश की है. अपने पैरों पर खड़े होने के बाद खुशदीप चाहे तो इस आर्थिक मदद से महरूम हो सकती है.

गौरतलब है कि नायब सूबेदार, परमजीत सिंह जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में पाक हमले में शहीद हो गए थे. इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम ने इस क्षेत्र में हमला किया था. 42 साल के परमजीत की कमाई से ही घर चलता था. परमजीत की दो बेटियां हैं और एक बेटा है. उनकी छोटी बेटी खुशदीप 12 साल की है, वहीं बड़ी बेटी सिमरदीप 15 साल की है. जुड़वां भाई साहिलदीप उम्र में सबसे छोटा है.

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पंजाब के मालेरकोटला में पैदा हुए यूनुस खान 2010 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वे कुल्लु में डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात हैं. उनकी पत्नी अंजुम आरा, 2011 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और सोलान में सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस के पद पर हैं. इस दंपति को एक चार साल का बच्चा भी है.

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खान ने कहा कि 'खुशदीप अपने परिवार के साथ ही रह सकती है. हम उसकी ज़रुरतों को पूरा करने की कोशिश करेंगे और उससे समय-समय पर मिलकर उसकी समस्या को सुलझाने की कोशिश करेंगे. अगर वो आईएएस, आईपीएस या कुछ और बनना चाहती है तो हम उसकी मदद को तैयार है. ये हमारी तरफ़ से एक छोटी-सी मदद होगी. मुझे लगता है कि हर किसी को अपने देश और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए'.

शहीद सूबेदार के छोटे भाई रंजीत सिंह को जब इस बारे में पता चला तो वे एक ऐतिहासिक घटना का ज़िक्र किए बिना नहीं रह पाए. उन्होंने कहा कि 'मुसीबत के समय हमारे परिवार की मदद करने वाले इस दंपति का मैं बेहद शुक्रगुज़ार हूं. इससे मुझे वो वाकया भी याद आ गया, जब नवाब शेर मोहम्मद खान ने गुरु गोबिंद सिंह के बेटों की सज़ा के खिलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद की थी'.

गौरतलब है कि 1705 में गुरु गोबिंद सिंह के दो बेटों को सिरहिंद में पकड़ लिया गया था. नवाब शेर मोहम्मद खान ऐसे एकमात्र मुस्लिम शासक थे, जिन्होंने गुरु के बेटों की सज़ा के खिलाफ़ आवाज उठाई थी. गुरु गोबिंद सिंह को जब इस बारे में पता चला था, तो उन्होंने नवाब को शुक्रिया अदा किया और उन्हें आशीर्वाद दिया.

रंजीत सिंह ने कहा 'मैं देश के सभी सीनियर अधिकारियों से गुज़ारिश करना चाहता हूं कि वे इस दंपति से प्रेरणा लें और सैनिकों के परिवार की जितनी मदद हो सके, वो करने की कोशिश करें. मैं देश के आध्यात्मिक गुरुओं से भी अपील करता हूं कि वे भी जवानों के परिवारों की मदद के लिए आगे आएं'.

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