पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ दिनों से धार्मिक कारणों से विवाद ज़ोरों पर है. एक अक्टूबर को मुहर्रम पड़ने के कारण सरकार ने दुर्गा मूर्ति विसर्जन 30 सितंबर को रात दस बजे के बाद करने पर रोक लगा दी थी लेकिन बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में इस मसले पर सुनवाई हुई जहां अदालत, पश्चिम बंगाल सरकार की दलीलों से सहमत नहीं दिखा. पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस फ़ैसले के लिए ठोस दलीलें पेश करने के लिए कहा वहीं बीजेपी ने इस मामले में ममता बनर्जी पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया.

जहां राजनीतिक पार्टियां और राजनेता अपनी अपनी पॉलिटिक्स में बिज़ी हैं और दोनों धर्मों के लोगों के बीच परेशानियां पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं वहीं शहर के लोग सांप्रदायिक सौहार्द कायम कर मिसाल पेश कर रहे हैं.

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इस साल पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में मुस्लिम समुदाय ने मुहर्रम की तैयारियों पर विराम लगा दिया क्योंकि ये लोग कैंसर से जूझ रहे अपने एक हिंदू पड़ोसी की मदद करना चाहते थे. रिपोर्ट के अनुसार, एक स्थानीय क्लब, हर साल खड़गपुर के पुरातन बाज़ार में मुहर्रम का आयोजन कराता है और इसके लिए ये क्लब 50,000 रूपयों का इंतज़ाम कराता है. हर साल की तरह इस साल भी ये पैसा इकट्ठा किया गया लेकिन ये मुहर्रम के लिए नहीं बल्कि अबीर भुनिया के लिए था. भुनिया Hodgkin's lymphoma से पीड़ित हैं और उन्हें अपने इलाज के लिए 12 लाख रूपयों की ज़रूरत है जिसमें बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी शामिल है.

भूनिया ने कहा 'मुझे नहीं पता कि मैं ठीक हो पाऊंगा या नहीं लेकिन मेरे पड़ोसियों ने मेरे लिए जो कुछ भी किया है, उसे मैं कभी भुला नहीं सकता.' गौरतलब है कि भूनिया सरोज गुप्ता कैंसर सेंटर में कीमोथेरेपी करा रहे हैं और ये क्लब भी भूनिया के लिए कुछ और पैसों के इंतज़ाम की कोशिशों में जुटा हुआ है. समाज संघा के सेक्रेटरी अमजद खान के मुताबिक, हम हर साल मुहर्रम की तैयारियों के लिए जुटते हैं लेकिन किसी की ज़िंदगी से बढ़कर आयोजन तो नहीं होता है.'

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लेकिन ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हुआ है और बंगाल में सांप्रदायिक सौहार्द की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं.

मसलन, कोलकाता से 125 किलोमीटर दूर एक गांव सुनूर में दुर्गा पूजा के दौरान ड्रम बजाने वाले एक ग्रुप मुहर्रम के दौरान भी अपनी सेवाएं दी क्योंकि इस आयोजन के लिए बुलाए गए लोग पहुंचने में नाकाम रहे थे. यहां दुर्गा पूजा का आयोजन कराने वाले सेकेट्री का कहना था हमारे गांव में हर धार्मिक प्रोग्राम मनाया जाता है. मुस्लिम समुदाय के लोग, दुर्गा पूजा में शामिल होने आते हैं वहीं हिंदू महिलाएं भी मुहर्रम पर व्रत रखती हैं.

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भले ही नेता और राजनीतिक पार्टियां बंगाल में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिशों में जुटी हो लेकिन ये घटनाएं साबित करती हैं कि जब तक लोगों के दिलों में इंसानियत बाकी है तब तक धर्म के नाम पर लड़ाने वाले नेताओं के मंसूबे पूरे होना मुश्किल है.

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