अगर कभी आपने अखबारों में आने वाले गुमशुदगी वाले विज्ञापनों पर गौर किया हो, तो उनमें गुमशुदा व्यक्ति को गुम हुए महीना दो महीना बीतने के बाद ही लोगों की उम्मीदें धूमिल होने लगती हैं. लेकिन बेंगलुरू का एक परिवार ऐसा है, जिन्होंने 33 सालों बाद भी अपने परिवार के सदस्य के मिलने को लेकर उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं.

बेंगलुरू की एक लड़की के अजीबोगरीब मामले ने हाल ही में सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोरी हैं. दरअसल, 1983 में मीनाक्षी नाम की ये लड़की अपने सपनों को पूरा करने के लिए बेंगलुरू से मुंबई आई थी. और ये वो समय था जब मीनाक्षी के परिवार ने उसे आखिरी बार देखा था. लेकिन मीनाक्षी की गुमशुदगी के 33 सालों बाद उसकी पांच बहनों को एक बार फिर उम्मीद बंधी है कि उनकी बहन घर वापस ज़रूर आएगी.

यही कारण है कि उन्होंने हाल ही में एक बार अपनी उम्मीदों को बनाए रखने के लिए मुंबई के अख़बार में मीनाक्षी की गुमशुदगी के बारे में रिपोर्ट दर्ज कराई है और इस विज्ञापन पर एक ट्विटर यूजर की नज़र पड़ गई.

ScoopWhoop ने हाल ही में मीनाक्षी के भतीजे गुरूप्रसाद से बात की. उसने बताया कि मीनाक्षी एक्टिंग को लेकर काफी पैशेनेट थी. वह अक्सर दूसरे शहरों में जाकर फिल्मों और थियेटर में एक्टिंग किया करती थी. उसकी इस पसंद से तंग आकर घर वालों ने उसे काउंसिलंग के लिए भी भेजा था, लेकिन मीनाक्षी वहां से भी भाग आई. नवंबर 1983 में मीनाक्षी ने अपने घर वालों को कहा कि वह घर छोड़कर फिल्मों में अपना करियर बनाने जा रही है, लेकिन उसके परिवार को लगा कि वह हर बार की तरह ही इस बार भी वापस आ जाएगी, परंतु इस बार ऐसा नहीं हुआ.

1980 के दशक में सूचना का कोई ऐसा माध्यम नहीं था, जिसकी वजह से मीनाक्षी का परिवार उससे संपर्क कर पाता. मीनाक्षी के एड्रेस और फोन नंबर के बारे में घर वालों को कोई जानकारी नहीं थी, ऐसे में इस फैमिली में पुलिस में एफआईआर दर्ज करवा कर खुद से मीनाक्षी को ढूंढना शुरु कर दिया था.

मीनाक्षी की सबसे बड़ी बहन ने उसके बारे में पता लगाने की काफी कोशिश की थी, लेकिन उसे कोई सफलता हाथ न लगी. पूरे परिवार ने कई सालों तक उसके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की थी मगर समय बीतने के साथ-साथ और आर्थिक कठिनाईयों के बीच उसकी सभी बहनें अपने अपने परिवार के साथ व्यस्त होती चली गईं और मीनाक्षी को लेकर उम्मीदें धूमिल पड़ने लगी.'

हाल ही में पड़ोस के किसी व्यक्ति ने मीनाक्षी के परिवार को सूचना दी थी कि उसने मीनाक्षी के जैसा ही जाना पहचाना चेहरा मुंबई में देखा था. घरवालों को ये जानकर मीनाक्षी के वापस मिलने को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ गई और उन्होंने मीनाक्षी को लेकर खोज एक बार फिर तेज कर दी.

ये पहली बार था जब इस परिवार ने विज्ञापन के द्वारा मीनाक्षी को ढूंढने की कोशिश की हो और उन्हें उम्मीद है कि उनके इस कदम के बाद मीनाक्षी के बारे में सबूत जुटाने में कामयाब होंगे.

गुरूप्रसाद ने कहा कि हम इस विज्ञापन के द्वारा उसके बारे में कुछ प्रमाण हासिल करने की कोशिशों में हैं. क्या पता उसने शादी कर ली हो और उसके पति या बच्चों की इस विज्ञापन पर नजर चली जाए या शायद उसके बारे में जानने वाला कोई व्यक्ति हमें कोई सूचना उपलब्ध करा दे.

अगर इस विज्ञापन से कोई फायदा नहीं होता है, तो ये परिवार कई और विज्ञापनों की तैयारियों पर भी विचार कर रहा है.

गुरूप्रसाद ने कहा कि "हम मुंबई और उसके अलावा कई बड़े शहरों के कई अखबारों में भी उसके बारे में विज्ञापन छपवाने के बारे में सोच विचार कर रहे हैं, क्योंकि वह भारत के किसी भी हिस्से में हो सकती है.''

गुरूप्रसाद ने बताया, 'मेरी मां को उम्मीद है कि वो वापस आ जाएगी. चाहे आप इसे अंदर से आती हुई एक आवाज कहें या कुछ और, लेकिन मीना आंटी पिछले कई दिनों से मेरी मां के सपनों में आ रही है. उम्मीद है कि मीनाक्षी का परिवार उसे ढूंढने में कामयाब रहेगा.'