छोटे शहर की छोटी-छोटी कहानियां जानने में शायद ही किसी को कोई दिलचस्पी हो. पर इसी कहानी को अगर नवाज़ुद्दीन सिद्दकी बताये, तो कहानी जानने वालों की तादाद में थोड़ा इजाफ़ा ज़रूर देखने को मिलेगा. कुछ ऐसी ही कहानी को पर्दे पर नवाजुद्दीन सिद्दकी के साथ ले कर आये हैं श्लोक शर्मा, जो नवाज़ के साथ 'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर' में भी काम कर चुके थे.

टीचर और स्टूडेंट के बीच की लव स्टोरी को पर्दे पर भले ही अस्वीकार कर दिया जाये, पर इसकी शुरुआत अख़बार में छपी एक ख़बर से होती है, जिसमें एक ऐसे ही किस्से को सुर्खियों में डाला गया था. हर ख़बर की तरह ही ये ख़बर भी एक बीती ख़बर बन कर रही गई, जिस पर लोगों ने चुटकियां लीं, तो कुछ ने दोनों के रिश्ते को गलियां दी.

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पर श्लोक शर्मा को इस खबर में कुछ ट्विस्ट दिखाई दिया, जिस पर उन्हें एक फ़िल्म बनाने का आईडिया आया. 1 करोड़ की लागत में तैयार हुई ये फ़िल्म अपने राइट्स को बेचकर बेशक फायदे का सौदा कर रही हो, पर इससे बढ़कर है इस फ़िल्म के कलाकारों को किरदारों के रूप में देखना.

अगर आप अब तक सिर्फ़ नवाजुद्दीन सिद्दकी और श्वेता त्रिपाठी की एक्टिंग के लिए ही फ़िल्म को देखने जा रहे हैं, तो थोड़ा-सा रुकिए क्योंकि इस बार आपको एक नन्हें कलाकार की भी तारीफ़ों के पुल बांधने के लिए विवश होना पड़ेगा.

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हर बार की तरह ही नवाजुद्दीन सिद्दकी अपनी मेथड एक्टिंग के रंग में रंगे हुए नज़र आये, तो श्वेता त्रिपाठी ने भी बचपन के उस किरदार को बखूबी पकड़ा, जिसमें सपने गलतियों की नांव में बहकर हिलोरे खाने लगते हैं.

कहानी की शुरुआत होती है मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से, जहां नवाजुद्दीन सिद्दकी एक ट्यूशन मास्टर के किरदार में घर पर ट्यूशन पढ़ाते हुए दिखाई देते हैं. इस मास्टर के किरदार को नवाज़ इस कदर जिन्दा करते हैं कि उसे देख कर एक बार, तो स्कूल के उस मास्टर की याद आ जाती है, जिसके घर पर चलने वाले ट्यूशन से ही एग्ज़ाम में पास होने का रास्ता जाता था.

श्वेता त्रिपाठी का किरदार शराबी पिता की ड्यूटी और अफ़ेयर के बीच उलझा हुआ नज़र आता है, जिसकी मां उसे बचपन में ही छोड़ कर उससे अलग हो गई थी. इन सब परिस्थितियों के बीच श्वेता को ट्यूशन मास्टर का सहारा मिलता है, जिनके साथ वो उन गलतियों को दोहराती है, जो सभ्य समाज में किसी टैबू से कम नहीं. फ़िल्म का हर किरदार अपनी एक्टिंग की एक गहरी छाप दर्शकों के दिल-ओ-दिमाग पर छोड़ता है.

इन सब के अलावा इस फ़िल्म में एक किरदार ऐसा भी है, जिसमें आप भविष्य का सुपरस्टार देख सकते हैं. जी हां मिंटू का किरदार निभाने वाले मोहम्मद समाद की एक्टिंग आपको उसका ऐसा कायल बनाएगी कि इसकी तारीफ़ किये बिना आप रह ही नहीं पाएंगे. अपने किरदार में जान का फूंकने का जो हुनर बड़े-बड़े कलाकारों के पास नहीं होता, उसे समाद अपने छोटे से किरदार में ज़िन्दा करता हुआ दिखाई देता है.

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खैर ज़्यादा संस्पेंस करने का तब तक कोई फायदा नहीं है, जब तक कि आप खुद इस फ़िल्म को देखने के बाद हॉल से तारीफ़ करते हुए बाहर नहीं निकलते.

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