जेवलिन थ्रो ख़रीदने के लिए पैसे नहीं थे, अच्छे कोच से भी ट्रेनिंग नहीं ले सकते थे, यूट्यूब पर वीडियो देखकर सीखा ये खेल और बन गए एशिया के चैम्पियन. कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है एशियन गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले नीरज चोपड़ा की.

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हरियाणा में पानीपत के गांव खंदरा के रहने वाले 20 साल के जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने वो कर दिखाया, जो आज तक कोई भारतीय नहीं कर पाया था. नीरज से पहले 1982 में गुरतेज सिंह ने जैवलिन थ्रो में कांस्य पदक जीता था.

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इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में खेले जा रहे 18वें एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज पहले भारतीय बने. नीरज ने फ़ाइनल में 88.06 मीटर जैवलिन फेंककर ये कारनामा कर दिखाया.

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नीरज ने ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत को स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रचा था. नीरज ने उस प्रदर्शन को यहां भी जारी रखते हुए गोल्ड अपने नाम किया. उन्होंने साल 2016 में हुए विश्व जूनियर चैंपियनशिप में 86.48 मी भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता था, जबकि दोहा डायमंड लीग में नीरज ने 87.43 मीटर के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था.

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जेवलिन थ्रोअर बनने की तैयारियों के वक़्त एक दौर ऐसा भी आया जब नीरज के पास जेवलिन ख़रीदने के लिए पैसे तक नहीं थे. एक अच्छी जेवलिन की क़ीमत डेढ़ लाख रुपये तक होती है, बावजूद इसके नीरज ने हौसला नहीं खोया. पिता सतीश कुमार व चाचा ने सात हज़ार रुपये जोड़कर नीरज को एक सस्ता जेवलिन ख़रीदकर दिया, जिससे नीरज हर दिन आठ घंटे अभ्यास किया करते थे. इन हालातों में अच्छे कोच से ट्रेनिंग लेना तो दूर की बात थी, ऐसे में नीरज ने यूट्यूब पर वीडियो देखकर इस खेल की बारीकियों को जाना.

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इसी कड़ी मेहनत के दम पर नीरज ने अंडर-16, 18 और 20 में कई नेशनल रिकॉर्ड बनाये. इस प्रदर्शन के आधार पर उनका इंडिया कैंप के लिए चयन हुआ, जहां नीरज को पहली बार डेढ़ लाख रुपये वाले जेवलिन से अभ्यास करने का मौका मिला. इसके बाद उनको ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी में कोचिंग करने का मौका भी मिला.

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ANI से बात करते हुए नीरज ने कहा, 'ये टूर्नामेंट मेरे लिए बेहद ख़ास रहा, मैंने अच्छी ट्रेनिंग की थी और मेरा पूरा ध्यान देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने पर था. मैं अपना मेडल अटल बिहारी वाजपेयी जी को समर्पित करना चाहता हूं, वो एक महान शख़्स थे.'
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नीरज को मिली इस सफ़लता के बाद उनके कोच उवे होन ने ट्वीट कर कहा कि कहा कि 'नीरज तुमने बहुत अच्छा किया, इस लय को कायम रखो'.

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नीरज इस समय भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर नियुक्त हैं और साथ ही कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से बीए की पढ़ाई भी कर रहे हैं. नीरज एशियन गेम्स 2018 में भारतीय दल के ध्वजवाहक भी रहे.

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