सियाचिन दुनिया का सबसे ऊंचा और मुश्किल वॉरजोन माना जाता है. करीब 21,700 फ़ीट की ऊंचाई पर सिय‍ाचिन ग्‍लेशियर में तैनात भारतीय जवानों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. यहां सैनिकों को साल के 12 महीने बर्फ़ में रहकर देश की रक्षा करनी होती है. इस दौरान यहां का तापमान इतना कम होता है कि इंसान का ख़ून तक जम जाता है. ऐसे में जवानों को कई तरह की सावधानियां बरतनी पड़ती हैं. इस दौरान जवानों को नहाने के लिए कम से कम तीन महीने यानि कि 90 दिनों का इंतज़ार करना पड़ता है.

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'वॉटरलेस बॉडीवॉश' से नहा सकेंगे सैनिक

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अब सियाचिन में तैनात जवानों को ऐसे प्रॉडक्‍ट्स दिए जाएंगे जो पूरी तरह से वॉटरलेस होने के साथ-साथ हाईजीनिक भी होंगे. साथ ही जवानों को अब नहाने के लिए 90 दिनों का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा. इस 'वॉटरलेस बॉडीवॉश' के इस्तेमाल से जवान हफ़्ते में कम से कम दो बार नहा सकते हैं. मात्र 20 मिलीलीटर जेल से पूरी बॉडी को वॉश किया जा सकेगा.

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अधिकारियों के मुताबिक़, इस वॉटरलेस बॉडीवॉश को आर्मी डिज़ाइन ब्‍यूरो (एडीबी) ने बनाया है. एडीबी ने इस पर अगस्‍त 2016 में काम शुरू किया था. जिसे सेना और प्राइवेट सेक्‍टर की कंपनी ने मिलकर तैयार किया है. जल्द ही 'रिसर्च एंड डेवलपमेंट' का काम पूरा होने के बाद ये सभी प्रोडक्ट्स जवानों तक पहुंच जायेंगे. वहीं दिल्‍ली आईआईटी ने जवानों के लिए हाइजीन प्रोडक्ट्स तैयार किये हैं.

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हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स के मुताबिक़, कोलकाता स्थित पूर्वी कमान, जो चीन के साथ भारत की विवादित सीमा की रखवाली करती है, उसने उत्पादों का परीक्षण कर ऑर्डर दिया है.

किन मुश्किलों का सामना करते हैं सैनिक

सियाचिन की लगभग 80 प्रतिशत पोस्‍ट्स 16,000 फ़ीट से ज़्यादा की ऊंचाई पर स्थित हैं. करीब 21,753 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित बाना पोस्‍ट यहां की सबसे ऊंचाई वाली पोस्ट है. जवानों को यहां तक पहुंचने के लिए 28 दिनों तक चलना पड़ता है. इतने दिनों में जवान करीब 128 किलोमीटर तक चलते हैं, तब कहीं जाकर पोस्‍ट पर पहुंच पाते हैं. यहां हर समय करीब 3,000 भारतीय सैनिकों तैनात रहते हैं. इस दौरान यहां का तापमान -60 डिग्री से भी नीचे चला जाता है.

क्‍या है भारत के लिए सियाचिन की अहमियत

सियाचिन, भारत के लिए कश्‍मीर से भी ज़्यादा अहमियत रखता है. सियाचिन भारत के लिए सुरक्षा और रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है. इसकी सुरक्षा में रोज़ाना करीब सात करोड़ रुपए ख़र्च होते हैं.साल 1984 के बाद से यहां पर कई बार घुसपैठ और कब्‍जे की कोशिशें हुई. न सिर्फ़ पाकिस्‍तान, बल्कि चीन की नज़रें भी सियाचिन पर रहती हैं. पाकिस्तान ने भी सियाचिन में अपनी सेना तैनात की हुई है.

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