हम कब सुधरेंगे?

ये मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि हम वाक़ई में कभी नहीं सुधरने वाले. हम लोगों को भले ही मखमल की प्लेट में हीरे सजाकर ही क्यों न दे दिए जाएं, लेकिन हम डिज़र्व प्लास्टिक वाली प्लेट ही करते हैं. साफ़ शब्दों में कहें, तो कुछ लोग जिस थाली में खा रहे हैं, उसी में छेद करने वाले काम कर रहे हैं.

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दरअसल, 4 नवंबर को इंडियन रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए मुंबई-पुणे के बीच लग्ज़री ट्रेन 'प्रगति एक्सप्रेस' चलवाई थी, लेकिन कुछ दिन बाद ही यात्रियों ने ट्रेन का क़ीमती सामान चोरी करना शुरू कर दिया. पिछले कुछ दिनों में प्रगति एक्सप्रेस से क़रीब 43 हज़ार का क़ीमती सामान चोरी हो चुका है. कुछ लोगों को इतनी भी शर्म नहीं आती है कि जिस ट्रेन को उनकी सुविधा के लिए बनाया गया है, वो उसी का सामान चोरी कर रहे हैं.

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इस तरह की हरकतें करके आख़िर हम क्या साबित करना चाहते हैं. हर वक़्त यही रोना रोया जाता है कि सरकार कुछ नहीं कर रही है. लेकिन आप क्या कर रहे हैं क्या कभी उस पर ध्यान दिया?

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हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, प्रगति एक्सप्रेस' के वॉशरूम से 28 स्टील टैप्स, 8 वुडन फ़्रेम मिरर, 3 मोबाइल होल्डर, 25 नल होल्डर,16 स्टील डस्टबिन्स समेत कई अन्य चीजें यात्रियों द्वारा चुराई जा चुकी हैं. जिनकी कुल क़ीमत 43 हज़ार के क़रीब बताई जा रही है.

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और तो और यात्रियों ने उत्कृष्ट एक्सप्रेस वाले चार Logo Sticker भी फ़ाड़ दिए हैं, जबकि ट्रेन के वाशरूम में लगी टाइल्स को भी नुकसान पहुंचाया गया है. इस तरह की हरकत से यही समझ आता है कि ये लोग लग्ज़री ट्रेन के नहीं, बल्कि पैसेंजर ट्रेन के ही लायक हैं.

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मुंबई-पुणे प्रगति एक्सप्रेस पनवेल होते हुए 189 किमी की दूरी को क़रीब 3 घंटे और 25 मिनट में तय करती है. प्रगति एक्सप्रेस के प्रत्येक कोच में एंटी-ग्रैफ़िटी वायनिल रैपिंग की गई है. जबकि ब्रेल स्टीकर्स, स्टील लगेज रैक, वुडन फ़्रेम मिरर, रोलर कर्टेंस, पैसेंजर इंफ़ोर्मेशन सिस्टम और हर कोच में ऐक्रिलिक मोबाइल होल्डर जैसी सुविधाओं से लेस इस ट्रेन को चले अभी एक महीना भी नहीं हुआ है.

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सेंट्रल रेलवे के चीफ़ पब्लिक रिलेशन ऑफ़िसर सुनील अडासी ने कहा कि वो हर समय यात्रियों को उच्च आधुनिक सुविधाएं और सेवाएं प्रदान करने की कोशिश में लगे रहते हैं. यात्रियों से अपील है कि कृपया वो इन सुविधाओं का ग़लत उपयोग न करें.

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इससे पहले 'तेजस एक्सप्रेस' में भी यात्रियों द्वारा कुछ इसी तरह की शर्मनाक हरकत की गई थी. मुंबई-गोवा के बीच चलने वाली 'तेजस एक्सप्रेस' में यात्रियों ने एलसीडी स्क्रीन को नुक्सान पहुंचाने के साथ-साथ हेडफ़ोन्स तक चुरा लिए थे.

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वेस्टर्न रेलवे के मुताबिक़, पिछले साल लंबी दूरी की ट्रेनों से पैसेंजरों ने 1.95 लाख तौलिये, 81,736 चादरें, 55,573 तकियों के कवर, 5,038 तकिये और 7,043 कंबल, 200 टॉयलेट मग, 1000 नल और 300 से ज़्यादा फ़्लश पाइप चोरी किये थे. इन सभी लापता वस्तुओं की कुल अनुमानित लागत 14 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी.