आज भी जब किसी गली-मोहल्ले में झगड़ा होता है तो अकसर एक जुमला सुनने को मिलता है- "इन्हें देखो दारा सिंह बनने की कोशिश कर रहे हैं, या ज़्यादा दारा सिंह न बनो". पहलवानों के पहलवान, दारा सिंह हम भारतीयों के लिए क्या अहमियत रखते हैं, ये इसी से ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है. उस ज़माने में नौजवानों के आइकॉन रहे दारा सिंह ने 50 साल पहले आज ही के दिन वर्ल्ड चैंपियनशिप का ख़िताब जीतकर पूरी दुनिया को भारत की ताकत का एहसास करा दिया था.

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1983 में मुंबई में हुई वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में 29 मई को दारा सिंह ने ये ख़िताब अमेरिका के Lou Thesz को चारो खाने चित्त कर जीता था. लगभग 50 साल के करियर में दारा सिंह ने 500 मुकाबले लड़े और इनमें से एक में भी उन्हें कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा था.

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ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े और ख़ूंखार पहलवान कहे जाने वाले किंग कॉन्ग से पूरी दुनिया के पहलवान ख़ौफ खाते थे. मगर जब दारा सिंह और किंग कॉन्ग का आमना-सामना हुआ, तो ये मैच हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बन गया. दारा सिंह ने जिस तरह से किंग कॉन्ग को सिर से पकड़ कर पटक दिया था, उसे देख कर सभी दंग रह गए थे. इसके बाद उन्होंने उसे रिंग के बाहर भी फेंक दिया था.

इससे पहले दारा सिंह 1959 में Commonwealth Champion बन चुके थे. पहलवानी के साथ ही दारा सिंह बॉलीवुड की कई फ़िल्मों में भी नज़र आए. उनके द्वारा रामानंद सागर के सबसे चर्चित सीरियल 'रामायण' में निभाई गई हनुमान की भूमिका को आज भी लोग भुला नहीं पाए हैं.

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आख़िरी बार इन्हें शाहिद-करीना की सुपरहिट फ़िल्म 'जब वी मेट' में देखा गया था. जुलाई 2012 को इनका निधन हो गया था. इस टाइटल को जीतने के 50 साल बाद भी कुश्ती में उनके पैंतरों को फॉलो किया जा रहा है. रुस्तम-ए-हिंद उर्फ़ दारा सिंह भले ही हमारे बीच न रहे हों, लेकिन वो हमेशा हम भारतीयों के दिलों में ज़िंदा रहेंगे.