करियर में आगे बढ़ने का प्रेशर हो या फिर अच्छी नौकरी पाने का प्रेशर, हर कोई इससे जूझ रहा है. आज के दौर में नौकरी पाने के लिए हमें हज़ारों लोगों से Competition करना पड़ता है. जब इतनी जद्दोजहद के बाद नौकरी मिलती है, तो उस में बने रहने के लिए हमें हर दिन कुछ न कुछ नया करना पड़ता है. इसके लिए हमें ओवरटाइम भी करना पड़ता है. ज़्यादा काम कराये जाने के कारण हम इस प्रेशर को हैंडल नहीं कर पाते हैं, और यूथ इसी प्रेशर के कारण डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं.

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ओवरटाइम कोई अच्छी बात नहीं है, लेकिन नौकरी में बने रहने के लिए हमें एक्स्ट्रा काम करना ही पड़ता है. कभी ज़रूरी काम के बहाने तो, कभी किसी सहकर्मी के ऑफ़िस न आने के कारण. हम सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ऑफ़िस में काम करते हैं और हर दिन हमें 1 घंटा एक्स्ट्रा काम करना पड़ता है. इस हिसाब से हमें 1 साल में तकरीबन 300 घंटे एक्स्ट्रा काम करना पड़ता है. इससे इस बात का पता चलता है कि हमने अपनी ज़िन्दगी के इतने घंटे यूं ही बर्बाद कर दिए.

भारत समेत तमाम साउथ एशियन देशों में एक्स्ट्रा काम लेना कोई बड़ी बात नहीं है, बात हमारे देश की करें तो यहां दो लोगों का काम एक व्यक्ति से कराया जाता है. इसके लिए उसे एक्स्ट्रा पैसा भी नहीं दिया जाता है.

अमेरिका, ब्रिटेन और जापान सरीखे विकसित देशों में काम करने का समय तय रहता है. इन देशों में चाहे काम पूरा हो या न हो Working Hours पूरे होने पर कर्मचारियों को हर हाल अपनी सीट छोड़ देनी होती है. तय समय से ज़्यादा काम करने पर क़ानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी है. जबकि हमारे देश में आज भी काम करने की कोई समय -सीमा तय नहीं है. लोगों से लगातार 8 से 12 घंटे काम कराया जाता है. श्रम मंत्रालय ने आज तक इस तरह की कोई गाइडलाइंस तय नहीं की हैं, जिससे कि ये शोषण रुक सके.

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आखिर वो कौन सी वजह है जो हम काम के बोझ तले दबे जा रहे हैं?

अगर आपको इस समस्या से छुटकारा पाना है तो आपको टाइम मैनेजमेंट का पालन करना होगा. समय से ऑफ़िस पहुंचकर तय समय से पहले अपना काम ख़त्म करना होगा. उसके बाद बचे हुए वक़्त में आप अपने अगले दिन के काम को लेकर चर्चा कर सकते हैं, ताकि अगले दिन काम कैसे और क्या करना है, इसमें वक़्त ज़ाया न करना पड़े. अगर आप अपने काम के प्रति यूं ही सतर्क रहेंगे, तो भविष्य में आपको कोई दिक्कत नहीं आएगी.

एक्स्ट्रा काम करने से ये समस्याएं हो सकती हैं:

अगर आप अपने शरीर को आराम नहीं देंगे तो आपको कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं. समय से नहीं सोना, ज़ल्दी उठना और वक़्त-बेवक़्त खाना-खाने से, डिप्रेशन, पेट की तकलीफ़, शुगर और दिमाग़ी बीमारी का होना कोई बड़ी बात नहीं है.

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लेट नाईट तक काम करना, शिफ़्ट में काम करना, रात को देर से सोना, समय से पहले जगना और समय से खाना नहीं खाना. अगर आप भी इसी तरह का कोई काम करते हैं, जिससे आपको शारीरिक और मानसिक दिक्कतों का सामना करना पड़े, तो जल्द से जल्द संभल जाएं .

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