गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत सरकार ने साल 2019 के पद्म अवॉर्ड्स की घोषणा की. ये सम्मान देश के लिए किसी भी क्षेत्र में असाधारण काम करने वाले नागरिकों को दिया जाता है. इस बार पद्मश्री अवॉर्ड के लिए 112 लोगों को चुना गया है, जिनमें 12 किसान, 14 डॉक्टर और 9 स्पोर्ट्स पर्सन शामिल हैं.

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जिन 12 किसानों को पद्मश्री अवॉर्ड दिया जाएगा उन्हीं में से एक हैं मध्य प्रदेश के सतना ज़िले के एक छोटे से गांव में रहने वाले किसान बाबूलाल दहिया. उन्हें ये सम्मान देसी बीजों को संरक्षित करने के लिए दिया जा रहा है.

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पद्म श्री विजेता बाबूलाल दहिया ने एएनआई से इस बारे में बात करते हुए कहा- मैं बहुत ख़ुश हूं ये सम्मान पाकर. लेकिन जब मैं अपनी धान की पकी हुई फ़सल को देखता हूं तो मुझे और भी ज़्यादा ख़ुशी होती है. ये मुझे कुछ पा लेने की अनुभूती देती है. मैं साल 2005 पांच से ही बीजों के संरक्षित कर रहा हूं. आज मेरे पास अलग-अलग फ़सलों के 200 बीज मौजूद हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये वही किसान हैं, जिन्होंने एमपी सरकार से मंदसौर घटना के बाद पुरुस्कार लेने से इंकार कर दिया था. पिछले साल उनके राज्य की सरकार इन्हें किसान कर्मठ पुरुस्कार देना चाहती थी. लेकिन तब बाबूलाल ने ये कहते हुए सम्मान लेने इंकार कर दिया कि सूबे के किसान परेशान हैं. इसलिए वो ये सम्मान नहीं ले सकते.

पद्मश्री अवॉर्ड के लिए 9 राज्यों से 12 किसानों को चुना गया है. इनमें पुराने, पारंपरिक बीजों के संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले पारंपरिक किसान कमला पुजारी, राजकुमारी देवी, और हुकुमचंद पाटीदार का नाम भी शामिल है.

वहीं पशुपालन के लिए ये पुरस्कार मत्स्य पालन करने वाले किसान सुल्तान सिंह और डेयरी-प्रजनन के लिए किसान नरेंद्र सिंह को दिया जाएगा.

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