कुछ महीने पहले ही पाकिस्तान की एक यूनिवर्सिटी में एक छात्र को भीड़ ने इसलिए जान से मार दिया था कि उसने अल्लाह की मौजूदगी पर सवाल उठाये थे. पाकिस्तान में इससे पहले भी ईश निंदा करने के विरोध में लोगों को निशाना बनाया जा चुका है.

इसी क्रम में पाकिस्तान की आवाम ही नहीं, अब वहां की अदालत भी शामिल हो गई है. एक ताजा मामले के अनुसार, 30 वर्षीय तैमूर रज़ा पर आरोप है कि उनसे फ़ेसबुक पर प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ की निंदा की थी.

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वहीं बहावलपुर के एक सरकारी वकील शफ़ीक़ क़ुरेशी का कहना है कि 'उसने फ़ेसबुक पर मोहम्मद पैगम्बर के लिए आपत्तिजनक टिपण्णी की थी, जिसके आरोप में बहावलपुर की एंटी टेररिज्म कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई है.' ये पहला ऐसा मामला है, जब किसी को फ़ेसबुक पर टिपण्णी करने के जुर्म में मौत की सजा सुनाई गई है.

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क़ुरेशी के मुताबिक, रज़ा को काउंटर टेररिज्म ऑफ़िसर ने बहावलपुर के बस स्टॉप से गिरफ़्तार किया है. उसके फ़ोन में वो सामग्री भी मिली है, जिससे इस बात की पुष्टि हुई है कि उसने मोहम्मद साहब का अपमान किया था. रज़ा की सुनवाई बहावलपुर जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच हुई थी.

क़ुरेशी कहते हैं कि 'रज़ा, शिया समुदाय से आता है, जो पाकिस्तान में अल्पसंख्यक माना जाता है. उसने सुन्नी मुसलमानों के Deobani फिकरे के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक बातें कही थीं.'

पाकिस्तान में पहले भी शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच इसी बात को ले कर कई बार झड़पें हो चुकी है. यहां की राजनीति में भी ये मुद्दा कई बार गरमा चुका है.

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