पिछले साल कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों, दुनियाभर की राजनीतिक-फिल्मी हस्तियों, खिलाड़ियों और अपराधियों के आर्थिक लेन-देन की कलई खोलकर रखने वाले पनामा पेपर्स ने रसूखदार हस्तियों के बीच हंगामा खड़ा किया था. काले धन और टैक्स से जुड़े फ़्रॉड के चलते आइसलैंड और पाकिस्तान के पीएम की कुर्सी चली गई, ब्रिटेन के पीएम पर इस्तीफ़ा देने का दबाव बढ़ा क्योंकि इस लीक में उनके पिता का नाम सामने आया था, व्लादिमीर पुतिन, सऊदी अरब के राजा, यूक्रेन के राष्ट्रपति के अलावा अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय, गौतम अडानी के बड़े भाई समेत 500 भारतीयों के नाम भी सामने आए थे.

दुर्भाग्य से ताकतवर लोगों के खिलाफ़ बोलने की कीमत हमारी दुनिया में लोगों को कई बार चुकानी पड़ी है और यही कीमत डेफ़ने कैरुआना ग़लीज़िया को भी चुकानी पड़ी.

माल्टा के विदेशी कर पनाहगाह के बारे में खुलासा करने वाली खोजी पत्रकार डेफ़नी की कार में बम विस्फ़ोट होने से मौत हो गई. उनकी कार, एक प्यूज़ो 108, एक शक्तिशाली ब्लास्ट डिवाइस से नष्ट हो गई, इस कांड में वाहन के परखच्चे उड़ हुए और पास के एक मैदान में कार के अवशेष बिखर गए.

डेफ़नी ने वर्ष 2016 में लीक हुए पनामा पेपर्स में माल्टा के संबंधों के बारे में लिखा था. उन्होंने लिखा था कि माल्टा के पीएम जोसेफ़ मस्कट की पत्नी और सरकार के चीफ़ ऑफ स्टाफ़ की, अजरबेजान से धन देने के लिए पनामा में विदेशी कंपनी थी. डेफ़नी ने कुछ दिनों पहले भी मस्कट और उनके दो करीबियों के बारे में बड़ा खुलासा किया था.

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डेफ़नी की मौत के बाद माल्टा के राष्ट्रपति लुइस कोलेरो ने इस हमले की निंदा की है. उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. राष्ट्रपति ने कहा कि 'इस घटना से मैं आहत हूं, इस वक्त मेरे पास शब्द नहीं हैं, लिहाजा आप लोग भी किसी तरह का फ़ैसला नहीं ले और शांति बनाए रखें.'

डेफ़नी ने जो दस्तावेज अपने ब्लॉग के जरिए लीक किए थे, उसे पढ़ने वालों की संख्या उनके देश के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार से भी कहीं ज्यादा थी. कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने माल्टा के अखबारों को बताया कि डेफ़नी ने दो सप्ताह पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं. हालांकि किसी समूह ने हमले की ज़िम्मेदारी का दावा नहीं किया है.

वहीं पत्रकार की मौत के बाद प्रधानमंत्री मस्कट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सभी जानते हैं कि डेफ़नी कैरुआना गलीजिया मेरी कट्टर विरोधी थी, राजनीतिक और व्यक्तिगत रूप से भी. लेकिन ये एक वीभत्स हमला है और इसे किसी भी तरह से सही नहीं ठहरा सकता है. मस्कट ने बाद में संसद में घोषणा की कि एफ़बीआई अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से बाहर की मदद के अनुरोध के बाद, माल्टा की जांच में मदद करने के लिए अपने रास्ते पर है.

दुनिया के ताकतवर लोगों के खिलाफ़ अपनी जान की परवाह किए बिना भी सच बोलने वाले इन्ही चंद लोगों की वजह से ही हमें आज कई रसूखदार चेहरों की खोखली परतों के बारे में जानने का मौका मिलता है. काम के प्रति ज़ज्बे और सिस्टम के विरूद्ध लड़कर अपनी जान गंवाने वाली डेफ़नी सही मायनों में राष्ट्रभक्त हैं और ऐसे ही लोगों की वजह से आज भी मानवता के प्रति लोगों की उम्मीदें धुंधली नहीं पड़ी हैं.

Source: The Guardian