परेश रावल उर्फ़ बाबू भाई की गिनती बॉलीवुड के उन चुनिंदा कलाकारों में होती है, जो हर फ़न में माहिर हैं. 90's का ये ख़तरनाक विलेन आज का सबसे मज़ेदार कॉमेडियन है. परेश रावल जितने ख़तरनाक विलेन के रोल में दिखते थे, उतनी ही लाज़वाब इनकी कॉमेडी होती है.

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बॉलीवुड में ऐसे कम ही कलाकार हुए हैं जो निगेटिव और कॉमेडी दोनों में इतने सफ़ल हुए होंगे. परेश विलेन के तौर पर हिट थे तो कॉमेडियन के तौर पर सुपरहिट हैं. ये बाबू राव का स्टाइल है कि वो हर किरदार में जान डाल देता है. हाल ही में उन्होंने संजय की बायोपिक 'संजू' में सुनील दत्त के किरदार को अपनी शानदार अदाकारी से जीवंत कर दिया.

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मुंबई में जन्मे परेश रावल ने अभिनय की शुरूआत 1984 में 'होली' फ़िल्म से की थी, इस फ़िल्म में उन्होंने छोटा सी भूमिका थी. साल 1986 में आई फ़िल्म 'नाम' से उन्हें असली पहचान मिली, जिसमें उन्होंने ख़लनायक की भूमिका निभाई थी. इस फ़िल्म की सफ़लता के बाद उनको कई फ़िल्मों में निगेटिव रोल निभाने को मिले.

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परेश रावल ने साल 1984 से साल 2000 तक तक़रीबन 150 से ज्यादा फ़िल्मों में अलग-अलग किरदार निभाए. इस दौरान उन्होंने अधिकतर विलेन के किरदार ही किये. नब्बे के दशक में परेश रावल की गिनती बॉलीवुड के सबसे ख़तरनाक विलेन के रूप में होती थी. सर, कब्जा, किंग अंकल, राम लखन, दौड़, बाज़ी और मोहरा जैसी कई फ़िल्मों में काम किया.

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वैसे तो परेश रावल जुदाई, हीरो नंबर 1, हसीना मान जायेगी जैसी कई अन्य फ़िल्मों में अपनी कॉमेडी का तड़का लगा चुके थे, लेकिन कॉमेडियन के तौर पर असली पहचान साल 2000 में आई फ़िल्म 'हेरा फेरी' से मिली. इस फ़िल्म के ज़रिये बाबू राव की कॉमेडी की दुकान ऐसी चली कि आज तक रुकने का नाम ही नहीं ले रही है.

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इसके बाद वो चुप-चुप के, हंगामा, गरम मसाला, वेलकम, भागम भाग, दे दना दन, मालामाल वीकली, आवारा पागल दीवाना, हलचल, अतिथि तुम कब जाओगे जैसी कई शानदार कॉमेडी फ़िल्मों के ज़रिये बॉलीवुड के नंबर वन हास्य कलाकार बन गए.

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'हेरा फेरी' का बाबू राव हो या फिर 'चुप चुप के' फ़िल्म का गुंडिया भाउ, इन फिल्मों के ज़रिये उन्होंने बॉलीवुड में कॉमेडी का ऐसा तड़का लगाया कि लोग आज भी उनकी एक्टिंग के दीवाने हैं. सर फ़िल्म का विलेन वेलजीभाई हो या फिर मोहरा का लालची इंस्पेक्टर साहू उनके ये किरदार आज भी लोगों की गालियां सुनते हैं.

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परेश रावल गुजराती थिएटर कलाकार रह चुके हैं, जब भी उन्हें समय मिलता है, वो रंगमंच पर अपनी कलाकारी का जौहर दखाने से पीछे नहीं हटते. उन्होंने टीवी धारावाहिक 'मैं ऐसी क्यों हूं', 'तीन बहू रानियां' और 'लागी तुझसे लग्न' में भी काम किया था.

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साल 1994 में उन्हें फ़िल्म 'वो छोकरी' और 'सर' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के रूप में 'राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार' से सम्मानित किया गया.