इन दिनों टीवी पर कॉमेडी शोज़ की होड़ लगी हुई है. कोई भी एंटरटेनमेंट चैनल हो, हर कोई बस टीआरपी के पीछे भाग रहा है. मगर टीआरपी की इस दौड़ में &TV का कॉमेडी शो 'भाभी जी घर पर हैं' पिछले 3 सालों से टॉप से शोज़ में अपनी एक जगह बना चुका है. सास-बहू के षड्यंत्र और साजिशों से भरे सीरियल्स के बीच ये एक ऐसा शो है, जो दर्शकों को हंसाता है, गुदगुदाता है और भाभियों को छेड़ जाता है. ये बना तो एडल्ट्स शो के तौर पर था, लेकिन इसे पसंद करने वालों में बच्चे भी हैं और बूढ़े भी.

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कानपुर के एक मोहल्ले के निवासियों के इर्द-गिर्द घूमती है 'भाभी जी घर पर हैं' की कहानी. नल्ला विभूति नारायण मिश्रा हो, बौड़म अंगूरी भाभी, कच्छा-बनियान उर्फ़ मनमोहन तिवारी, गोरी मेम उर्फ़ अनिता भाभी, या फिर हों न्योछावरखोर दरोगा हप्पू सिंह, नाटक का हर किरदार यूनिक है. विभूति, अंगूरी भाभी के पीछे दीवाना है, तो मनमोहन तिवारी गोरी मेम की एक झलक को बेताब रहता है. पिछले तीन सालों से हप्पू सिंह अपने नौ-नौ ठइयां बच्चन और एक प्रेग्नेंट बीवी की दुहाई देने से बाज़ नहीं आता, तो वहीं टीका-मलखान मोहल्ले की हर लड़की को छेड़ने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ते और बेचारा टिल्लू तो अपनी तनख्वाह के लिए मारा-मारा फिरता है.

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ये तो हो गई इस नाटक के मुख्य किरदारों की, लेकिन इनके अलावा भी कुछ किरदार ऐसे हैं जिनका नाम लिए बिना नाटक की बात अधूरी रह जायेगी. जैसे गुलफ़ाम कली, पागल सक्सेना जी, विभूतिये के लन्दन वाले चाचा जी, विभूति का लंगोटिया यार प्रेम, अंगूरी भाभी की अम्मा जी (मनमोहन तिवारी की मम्मी), अंगूरी भाभी के डैडू, कमिश्नर साहब और मोहल्ले का इकलौता रिक्शावाला पेलू.

इस सीरियल में वैसे तो हर किरदार अपने आप में अलग है, पर मैं जब भी ये सीरियल देखती हूं, तो मुझको सिर्फ और सिर्फ़ पेलू का ही इंतज़ार रहता है. क्या मुस्कान है, क्या अदा है, देखते ही दिल खुश हो जाता है.

आखिर कौन है ये पेलू रिक्शावाला

पेलू वो रिक्शावाला जो बोल नहीं सकता, केवल खींसे निपोर सकता है. आप उससे कुछ भी पूछो वो अपनी बत्तीसी दिखा देगा और ज़्यादा कुछ पूछोगे तोआपके हाथों में एक पर्ची थमा देगा. पर गज़ब की बात तो ये है कि आपके हर सवाल का जवाब पहले से ही उसके कान के पीछे पर्ची में लिखा होता है. बिन बोले वो सब कुछ बोल जाता है.

मल्टीटास्किंग पेलू

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पेलू वैसे तो रिक्शा चलाता है, लेकिन वो इंग्लिश में माहिर है. वो ऐरोप्लेन भी चलाना जानता है. जी हां एक बार जब पूरा मोहल्ला चाचा जी की शादी के लिए लन्दन जा रहा होता है और प्लेन में कुछ गड़बड़ी आ जाने पर पेलू प्लेन की सेफ़ लैंडिंग कराता है, तब सबको पता चलता है कि वो हवाई जहाज़ उड़ाना भी जानता है.

पेलू सुनता सबकी है, पर करता अपने मन की है

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जब भी मनमोहन तिवारी और विभूति नारायण को अपने ग़म ग़लत करने होते हैं, तो वो पेलू के रिक्शे पर बैठकर ही दारु पीते हैं और एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं और पेलू उनकी बातें सुनकर मोतियों जैसे अपने दांत दिखा देता है. वो जासूसी भी करता है.

कब कौन सा गाना बजाना ये भी पेलू को अच्छे से पता होता है

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पेलू रात में अपने रिक्शे पर ही सोता है और जब तक नींद नहीं आती तब तक वो टेप रिकॉर्डर पर गाना सुनता है. वहीं जब अनिता भाभी विभूति जी को घर से निकाल देती हैं, या मनमोहन तिवारी की पिटाई होती है, पेलू बिना वक़्त गवाएं सिचुएशन के हिसाब से गाना बजा देता है.

पेलू इस सीरियल का एकमात्र किरदार है, जिसे सीरियल में कभी मार नहीं पड़ी, जो कभी जेल नहीं गया, जिसको कभी किसी ने बेवक़ूफ़ नहीं बनाया, जो सबका प्यारा है. पेलू चुपके से दर्शकों के दिल में बिना कुछ बोले घर बना चुका है.

क्यों पेलू लन्दन में रिक्शा चलाएगा...

जाते-जाते बता दें कि पेलू चौरसिया का असली नाम अक्षय पाटिल है. जो अपनी मुस्कान से सबको दीवाना बना चुके हैं.