कभी एक मुल्क का हिस्सा रहे हिंदुस्तान और पाकिस्तान आज उस नदी के दो किनारों की तरह हो गये हैं, जो साथ-साथ चलने के बावजूद कभी नहीं मिल सकते. इसे मौजूदा राजनीतिक हालात कहिये या फिर सत्ता पक्ष की आकांक्षायें कि लाख चाहने के बावजूद दोनों कभी एक मंच पर नहीं आ सकते. बेशक सामरिक या राजनैतिक मंचों पर हिंदुस्तान और पाकिस्तान एक-दूसरे के कट्टर विरोधी हों, पर आज भी बहुत-सी चीज़ें ऐसी हैं, जिन्हें ले कर दोनों की अवाम एक-दूसरे पर जान छिड़कती है. आज हम कुछ ऐसे ही लोगों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जिन्हें हिंदुस्तान और पाकिस्तान के लोग एक जैसी इज़्ज़त देते हैं.

अल्लामा इक़बाल

भले ही बहुत से लोग अल्लामा इक़बाल को बंटवारे के लिए ज़िम्मेदार मानते हैं, पर हिंदुस्तान से उनकी मोहब्बत का अंदाज़ा 'सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा' से ही हो जाता है. उनकी नज़्म 'लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी' को सिर्फ़ पाकिस्तान में ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान में भी बड़े शौक से गाया जाता है. इसलिए अल्लामा इक़बाल को भारतीय उपमहाद्वीप में 'शेर-ए-मशरिक़' कहा जाता है.

रबीन्द्रनाथ टैगोर

भारत का राष्ट्रगान लिखने वाले गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर उन लेखकों में से एक थे, जिन्हें सिर्फ़ बांग्ला साहित्य पर ही नहीं, बल्कि पेंटिंग, संगीत और थिएटर पर भी महारत हासिल थी. उन्होंने अपने लेखन से जहां बांग्ला साहित्य को समृद्ध बनाया, वहीं दूसरी ओर अपनी रचना 'गीतांजलि' के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई बने. भारत के राष्ट्रगान के अलावा गुरुदेव ने पश्चिमी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) का भी राष्ट्रगान लिखा. रबीन्द्रनाथ टैगोर से ही प्रभावित हो कर विश्व भारती यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक छात्र Ananda Samarakoon ने श्रीलंका का राष्ट्रगान लिखा.

फैज़ अहमद फैज़

पाकिस्तान के नामी-गिरामी इंक़लाबी शायर फैज़ अहमद फैज़ का जन्म पंजाब के सियालकोट (आज का पाकिस्तान) में हुआ था. बंटवारे के बाद फैज़ साहब बेशक पाकिस्तानी हो गए, पर उनकी नज़्मों और ग़ज़लों ने सरहदों की सभी सीमाएं तोड़ीं. आज भी उनकी मशहूर नज़्म 'बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे, बोल ज़बां अब तक तेरी है' कई मौकों पर हिंदुस्तान और पाकिस्तान में बड़ी शिद्दत के साथ पढ़ी जाती है.

नूरजहां

नूरजहां का नाम उन लोगों में से एक था, जो विभाजन के बाद भी भारत-पाकिस्तान में समान रूप से लोकप्रिय थीं. ये उनकी आवाज़ का ही जादू था, जो पाकिस्तानी होने के बावजूद भारत में भी उनके फैंस की बड़ी संख्या थी. पाकिस्तान में 'मैडम' का मतलब बेशक एक ऐसी महिला के लिए था, जिसने कई शादियां कीं, तलाक़ लिया फिर प्यार किया और बहुत नाम कमाया, पर हिंदुस्तान में इस शब्द का मतलब सिर्फ़ 'मल्लिका-ए-तरन्नुम' नूरजहां के लिए था.

अजमल सुल्तानपुरी

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में जन्मे अजमल सुल्तानपुरी उन शायरों में से एक हैं, जिन्हें सिर्फ़ हिंदुस्तान में ही नहीं पाकिस्तान से ले कर बांग्लादेश तक शिद्दत की नज़रों से देखा जाता है. उनकी मशहूर नज़्म 'कहां है मेरा हिंदुस्तान' आज भी लोगों के बीच उतनी ही पॉपुलर है, जितनी कि सालों पहले हुआ करती थी.

सआदत हसन मंटो

जिन लोगों को बंटवारा भी नहीं बांट पाया, उनमें से एक नाम सआदत हसन मंटो का भी है. जिन्हें पाकिस्तान के साथ-साथ हिंदुस्तान की अवाम का भी भरपूर प्यार मिला. हिंदुस्तान में उनके प्यार का ये आलम है कि आज कई विश्वविद्यालयों में उनकी कहानियों को पढ़ाये जाने के साथ ही उन पर रिसर्च की जा रही है.

परवीन शाकिर

परवीन शाकिर एक ऐसा नाम है, जिसने ग़ज़लों और नग्मों के ज़रिये महिलाओं की मौजूदा स्थिति को दुनिया के सामने रखा. उनकी ग़ज़लों में भारतीय महिलाओं ने भी अपनी छवि को देखा और उतना ही प्यार दिया, जितना कि उन्हें सरहद पार की औरतों ने दिया.

किशोर कुमार

किशोर कुमार के दर्द भरे गाने हों या रोमांटिक नग्मे, उनकी आवाज़ का जादू, जितना हिंदुस्तान में था उतने ही पाकिस्तान में उनके प्रशंसक मौजूद हैं. आज भी पाकिस्तानी की किसी पार्टी में उनके गाने बड़े चाव से लोगों के बीच गुनगुनाये जाते हैं.

अब बहुत से लोग इस लिस्ट में अधूरे हैं. उम्मीद है कमेंट बॉक्स में आप उनका नाम लिख कर इस लिस्ट को पूरा करेंगे.