दिन भर अपराधियों से उलझी रहने वाली पुलिस आमतौर पर अपने सख़्त रवैये की लिए भी पहचानी जाती है. इस सख़्त रवैये की वजह से हम भूल जाते हैं कि इस खाकी वर्दी के पीछे भी एक इंसान है, जिसके अंदर भी कहीं न कहीं एक इंसानियत ज़िंदा है.

इसी इंसानियत को दुनिया के सामने रखा दिल्ली पुलिस के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर रामाश्रय सिंह, हेड कॉन्सटेबल राजेश कुमार और कॉन्सटेबल अशोक कुमार ने, जो एक शिकायत के बाद संदिग्धों की तलाश में रोहिणी पहुंचे थे. सुबह 4 बजे के करीब जब ये टीम संदिग्धों की तलाश में जुटी थी, तो दो सेंधमार नज़र आये. इन सेंधमारों की पहचान नितिन और सलमान के रूप में हुई है, जिन्हें पुलिस ने रोकने की कोशिश की, पर नितिन ने पुलिस पर फायरिंग कर दी.

इसके जवाब में पुलिस ने भी फ़ायरिंग की, जिसमें नितिन को पांच गोलियां लगी, जबकि सलमान भागने में कामयाब हो गया. नितिन को घायल अवस्था में पुलिस टीम ने नज़दीक के अंबेडकर हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां नितिन को बचाने के लिए 4 यूनिट खून की ज़रूरत पड़ गई.

हॉस्पिटल में खून न मिलने की सूरत में पुलिस टीम में तैनात तीनों सदस्य अपना खून देने के लिए राजी हो गए. हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए कॉन्सटेबल अशोक कुमार ने कहा कि 'वो पहले भी लोगों की जान बचाने के लिए ब्लड डोनेट कर चुके हैं.' अशोक ने आगे कहा कि अपराधियों पर गोली चलाना मेरा फ़र्ज़ था, जबकि इंसानियत को बचाना मेरा कर्तव्य.'

Source: logicalindian