पिछले साल नवम्बर में नोटबंदी की मार में कई लोग का दिवालिया निकल गया. राजनीतिक पार्टियों ने भले ही इसका विरोध किया, पर वो भी खुलकर प्रधानमंत्री के इस कदम की सराहना करते नज़र आये. बीते कुछ दिनों से नोटबंदी का असर थोड़ा कम होने लगा है, लोगों के हाथों में अब आसानी से 500 और 2000 रुपये के नोट दिखने लगे हैं.

हालांकि नोटों के हाथों पर आने के बाद लोग अब नोटों से जुड़ी ख़बरों की तरफ़ कम ही ध्यान दे रहे हैं, पर संसद में अब भी ये मुद्दा गरमाया हुआ है. राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय राज्य वित्तमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि:

'500 और 2000 रुपये के हर नोट की छपाई पर कुल 2.87 रुपए से 3.77 रुपए के बीच ख़र्च होते हैं.' हालांकि कुल लागत के बारे में पूछने पर मंत्री जी सवाल से बचते हुए नज़र आये और कहा कि 'अभी नोटों की छपाई चल रही है, जिसकी वजह से अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी.'

RBI की रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी के बाद से दिसम्बर तक, 12.44 लाख करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा हो चुके हैं, जबकि 11.64 लाख करोड़ रुपये के नए नोट बाज़ार में उपलब्ध हैं.

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